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कोर्ट में डीसीआरएल सहित नौ के खिलाफ परिवाद दायर,नियम विरूद्ध आदेश पारित करने के खिलाफ परिवाद दायर हुआ

On: December 23, 2024 7:35 AM
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कोर्ट में डीसीआरएल सहित नौ के खिलाफ परिवाद दायर,नियम विरूद्ध आदेश पारित करने के खिलाफ परिवाद दायर हुआ

:-कोर्ट ने आठ जनवरी 2025 को सुनवाई की तिथि तय की

न्यूज़96इंडिया,बिहार

मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज सिविल कोर्ट में भूमि सुधार उपसमाहर्ता (डीसीआरएल) आमिर अहमद सहित नौ लोगों के खिलाफ परिवाद दायर किया गया है। यह परिवाद चौसा प्रखंड के फुलौत थाना क्षेत्र के फुलौत पश्चिमी वार्ड संख्या चार के महेंद्र मेहता के पुत्र रंधीर कुमार ने दायर कराया है। जिसमें अधिकारी पर नियम विरुद्ध आदेश पारित करने का आरोप है। मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है। परिवादी के अधिवक्ता मंजीत कुमार ने बताया कि डीसीआरएल ने नियम विरुद्ध दस्तावेज को सही मानकर हाल सर्वे खतियानी दस्तावेज को दरकिनार कर आदेश पारित किया है। अधिवक्ता के मुताबिक ऐसे मामले में डीसीआरएल को इस तरह का आदेश पारित करने का अधिकार नहीं है। इस तरह का आदेश पारित करना दंडनीय अपराध है। दायर परिवाद में उल्लेख किया गया है कि परिवादी रंधीर कुमार का पूर्वज फागू मेहता के नाम से हाल सर्वे खतियान दर्ज है । इसमें अन्य आठ आरोपितों ने
जाल साजिश रचित वो बनावटी तथा विधि विरूद्ध सरकार के आदेश से वंचित प्रतिबंधित दस्तावेज का गलत इस्तेमाल किया है। आरोपितों ने जमीन हड़पने के लिए अपने नाम अंचल कार्यालय में अवैध दस्तावेज बीटी एक्ट 106 के आधार पर जमाबंदी कायम करा लिया। यह गलत है। परिवादी ने इससे पहले अंचल आदेश के विरूद्ध आरोपितों के खिलाफ नामांतरण अपील वाद 23 जुलाई 2022 भूमि सुधार उपसमाहर्ता के समक्ष आवेदन दाखिल किया। जहां डीसीआरएल ने प्रतिवादियों को उपस्थिति करवाकर दिनांक 30 अगस्त 2024 ई को विधि से वंचित दस्तावेज बीटी एक्ट 106 डिग्री तथा सरकार वो राजस्व एवं भुमि सुधार विभाग सचिव पटना नियम के विरुद्ध आदेश पारित कर दिया। अधिवक्ता ने बताया कि विधि विरुद्ध दस्तावेज को सही मानकर हाल सर्वे खतियानी दस्तावेज को दरकिनार कर आदेश पारित कर देना लोक सेवक के कार्य में विभागीय कार्रवाई सेवा से बर्खास्त के साथ कानूनी कार्रवाई में दंडीय अपराध कारित किया है। अधिवक्ता ने बताया कि प्रतिवादियों के मेली वो प्रभाव में नीजी स्वार्थ लालच में आकर हाल सर्वे खतियान के विरूद्ध मनमानी आदेश पारित कर देना गम्भीर अपराध है। जबकि हाल सर्वे खतियान को संशोधन करने वो रद्द करने वो अवैध करार करने का अधिकार वो शक्ति डीसीआरएल को नहीं है। वावजूद अपने पद वो कर्तव्य में लापारवाही वो मनमानी करते विभाग आदेश के विरूद्ध तथा विधि के विरूद्ध आदेश पारित करना दण्डीय अपराध है। उक्त पारित आदेश के बाद प्रतिवादियों ने जबरण वो हसैड़ी के बल पर जमीन पर कब्जा करने उतारू होकर परिवादी के साथ गाली-ग्लौज कर मारपीट करते जान मारने का प्रयास किया है। उसके बाद परिवादी ने ग्रामीण पंचायत बैठाकर आपसी सामाजिक समझौता से खतियानी दस्तावेज के आधार पर विवादित जमीन का मालिकाना हक बताते काफी समझाया गया । लेकिन प्रतिवादी नहीं मानें। परिवादी घटना की सूचना वरीय पदाधिकारी जिला दण्डाधिकारी मधेपुरा एवं पुलिस अधीक्षक मधेपुरा वो घटना स्थल थानाध्यक्ष फुलौत को घटना की लिखित जानकारी दिया गया। लेकिन सरकार के विभागीय ऑफिसर होने के कारण किसी भी वरीय पदाधिकारी के द्वारा डीसीआरएल के विरूद्ध विभागीय जॉच वो कमिटि गठित नहीं किया न विभागीय कार्रवाई किया। जिस कारण नामित अभियुक्तो के विरूद्ध किसी प्रकार का कोई दण्डीत कराने कानुनी कार्रवाई प्राथमिकि दर्ज नहीं हुआ तब लाचार होकर परिवादी न्यायालय के समक्ष बजरिये अधिवक्ता के माध्यम से परिवाद-पत्र दाखिल किया है।

कोट:-

प्रतिवादियों के मेली वो प्रभाव में नीजी स्वार्थ लालच में आकर हाल सर्वे खतियान के विरूद्ध मनमानी आदेश पारित कर देना गम्भीर अपराध है। जबकि हाल सर्वे खतियान को संशोधन करने वो रद्द करने वो अवैध करार करने का अधिकार वो शक्ति डीसीआरएल को नहीं है।
मंजित कुमार
परिवादी के अधिवक्ता
अनुमंडल व्यवहार न्यायालय, उदाकिशुनगंज।

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