नवीन तकनीक से आत्मनिर्भरता की ओर: जिलाधिकारी ने पशुपालकों और मछुआरों को किया प्रेरित, योजनाओं की समीक्षा के साथ संसाधनों का वितरण

मुजफ्फरपुर, 5 मई 2026जिले में पशुपालन एवं मत्स्य क्षेत्र को सशक्त बनाने हेतु नवीन आधुनिक तकनीक का प्रयोग, किसानों और मछुआरों की आय में वृद्धि तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के निमित्त जिलाधिकारी प्रयत्नशील है।
इस उद्देश्य से जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने भगवानपुर स्थित जिला स्तरीय संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र के नवनिर्मित भवन का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने भवन में संचालित जिला पशुपालन कार्यालय, जिला मत्स्य कार्यालय एवं जिला गव्य विकास कार्यालय का विस्तृत अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के क्रम में उन्होंने कहा कि कार्यालय व्यवस्था जितनी सुदृढ़ होगी, आम पशुपालकों को सेवाएं उतनी ही बेहतर तरीके से मिल सकेंगी।नवनिर्मित भवन के सभागार में मछुआरों एवं पशुपालकों के लिए आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने शिरकत की तथा विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहकर धरातल पर प्रभावी रूप से दिखना चाहिए। इसके लिए अधिकारियों को पारदर्शिता और तत्परता के साथ कार्य करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने पशुपालकों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि नई तकनीक से उत्पादन बढ़ेगा और आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव होगी।
जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार मेहता ने तीन बकरी वितरण योजना, तीन सूकर (सुअर) वितरण योजना, 10 से 100 बकरी फार्म योजना, बॉयलर एवं लेयर मुर्गी पालन योजना की जानकारी दी।
इसके अतिरिक्त पशुओं में बांझपन निवारण शिविर, नियमित टीकाकरण एवं उपचार सेवाओं की भी समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने इन सभी सेवाओं को और सुदृढ़ करने के निर्देश देते हुए कहा कि पशुपालकों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।उन्होंने सरकार की महत्वाकांक्षी मोबाइल वेटनरी यूनिट सेवा को और प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया।
1962 कॉल सेंटर के माध्यम से पशुपालकों के घर तक पशु चिकित्सा सेवा पहुंचाने की व्यवस्था को और बेहतर करने का निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि सुदूरवर्ती क्षेत्रों के पशुपालकों को इसका अधिकाधिक लाभ मिलना चाहिए।इसी क्रम में जिलाधिकारी ने मत्स्य विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की भी समीक्षा की।
उन्होंने मत्स्यपालकों से संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों को सुना तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कार्यक्रम के दौरान मत्स्यपालकों और मछुआरों के बीच तीन पहिया वाहन, जाल, आइस बॉक्स, नाव, माप यंत्र सहित विभिन्न उपकरणों का वितरण किया गया।
मुख्यमंत्री मत्स्य कल्याण योजना के अंतर्गत आयोजित वितरण कार्यक्रम में कुल 75 मत्स्य विक्रेताओं को मत्स्य विपणन किट प्रदान किया गया, जबकि 10 मत्स्य व्यवसायियों को तीन पहिया वाहन उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा दो मछुआरों को लकड़ी की नाव तथा 10 मछुआरों को फेंका जाल वितरित किया गया। इस योजना का उद्देश्य मछुआरों एवं मत्स्य विक्रेताओं को आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
जिलाधिकारी ने कहा कि आधुनिक संसाधनों के उपयोग से मछली उत्पादन, भंडारण और विपणन की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और लाभकारी बन सकती है। आइस बॉक्स और परिवहन साधनों की उपलब्धता से मछलियों को स्वच्छ एवं हाइजीनिक अवस्था में बाजार तक पहुंचाना संभव होगा, जिससे मछुआरों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि लाभुकों को आत्मनिर्भर बनाना है। पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं, जिनका सही उपयोग कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने नवनिर्मित भवन के रखरखाव, साफ-सफाई और संसाधनों के समुचित उपयोग पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि सरकारी परिसंपत्तियों का संरक्षण और उनका बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है।समग्र रूप से जिलाधिकारी की यह पहल जिले में पशुपालन एवं मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और संसाधनों से जोड़ते हुए किसानों और मछुआरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त श्री श्रेष्ठ अनुपम, उप मत्स्य निदेशक तिरहुत प्रमंडल, जिला पशुपालन पदाधिकारी, जिला मत्स्य पदाधिकारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।