महिला की बाली लेकर भाग रहे बेगूसराय के दो युवकों की लोगों ने की पिटाई, गंभीर

फेरी के नाम पर कर रहा था ठगी का काम, पुलिस ने दोनों युवकों को भीड़ से बचाया, पीएचसी में इलाज बाद रेफर
उदाकिशुनगंज थाना क्षेत्र के मूरलीचंदबा गांव के वार्ड संख्या 11 में बुधवार की दोपहर महिला की बाली लेकर भाग रहे बेगूसराय के दो ठग को पकड़ कर लोगों ने जमकर धुनाई कर दी। मौके पर पहुंचे पुलिस ने युवकों को भीड़ से निकाल कर पीएचसी में भर्ती कराया। एक युवक की हालत गंभीर है। जिसे मेडिकल कॉलेज मधेपुरा रेफ़र कर दिया गया है।
पकराएं युवक अमित कुमार पिता मोहन चौधरी और नीरज कुमार पिता अशोक साह
बेगूसराय के बलिया वार्ड संख्या आठ का रहने वाला है।
बताया जाता है कि युवक गांव में घुम कर फेरी काम के बहाने ठगी का काम किया करता था।
बुधवार को मूरलीचंदबा गांव में अवधेश मंडल की पत्नी का कान का बाली साफ करने के लिए लिया। फिर दूसरा बाली देकर ठग फरार हो गया। पता चलने पर लोगों ने पीछा किया। जहां लक्ष्मीपुर गांव के पास लोगों ने पकड़ कर जमकर धुनाई कर दी। सूचना पर पहुंचे पुलिस ने लोगों के भीड़ से निकाल कर जख्मी युवकों को पीएचसी में भर्ती कराया। जहां अमित कुमार की गंभीर हालत को देखते हुए उसे प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज मधेपुरा रेफ़र कर दिया गया।
जबकि दूसरे युवक नीरज कुमार को प्राथमिक उपचार के बाद थाना ले जाया गया। थानाध्यक्ष सुधाकर कुमार ने बताया कि मामले में जांच की जा रही है। लोगों ने बताया कि बुधवार को फेरी वाले गांव पहुंचे। फेरी वाले बाईक से थे। जहां कुछ समान खरीदने के लिए महिलाएं जुटी थी। फेरी वाले ने एक महिला से कहा कि आपके कान का बाली काफी गंदा हो गया है।लाइए साफ कर देते हैं। फेरी वाले ने बताया कि वह जेवरात सफाई का भी काम करते हैं।जहां महिला ने अपने कान का बाली सफाई करने दिया। थोड़ी सी ओझल होने पर ठग ने महिला को अपने पास का नकली बाली थमा दिया। फेरी वाले वहां से तुरंत निकल पड़े। जब क्षणिक बाद ही महिला को यह एहसास हुआ कि ठगी हुई तो वह बेहोश हो गई। पता चलने पर लोगों ने फेरी वाला का पीछा कर लक्ष्मीपुर गांव के पास पकड़ लिया। उसके बाद वहां बड़ी भीड़ जमा हो गई। जहां लोगों ने दोनों ठग की धुनाई कर दी।
अस्पताल में इलाजरत ज़ख्मी ठगों ने बताया कि वह नया गैस चूल्हा, लाइटर, कुकर आदि समान बेचने और ठीक करने का काम करते हैं। दोनों ने बताया कि मधेपुरा शहर के एक रैन बसेरा में छह माह से रहकर फेरी का काम करते हैं।