कटनी कभी सूख चुके तालाबों की तलहटी अब फिर से संवारी जा रही है।गांवों के पुराने कुएं और बावड़ियां नई पहचान पा रहे हैं। खेतों में बन रहे तालाब किसानों के चेहरे पर उम्मीद की चमक लौटा रहे हैं। जिले में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ 2026 अब केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक व्यापक जनआंदोलन बन चुका है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप तथा कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देशन में चल रहे इस अभियान के माध्यम से जिले में जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन के लिए अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं।
30 जून तक चलने वाले इस अभियान में प्रशासन, जनप्रतिनिधि, ग्रामीणजन और विभिन्न विभाग मिलकर जल बचाने की साझा मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं।जिले के ग्रामीण अंचलों में इन दिनों तालाबों का गहरीकरण, कुओं का पुनर्जीवन, खेत तालाब निर्माण, कूप पुनर्भरण और वाटरशेड विकास जैसे कार्य तेजी से जारी हैं। वर्षों से उपेक्षित पड़ी जल संरचनाएं अब फिर से जीवनदायिनी बनने की ओर अग्रसर हैं।
जल स्रोतों की साफ-सफाई, अतिक्रमण हटाने और वृक्षारोपण जैसे प्रयास पर्यावरण संरक्षण को भी नई मजबूती दे रहे हैं।अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। इसके साथ राजस्व, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, वन, कृषि, स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास सहित कुल 14 विभाग समन्वित रूप से कार्य कर रहे हैं।
कलेक्टर श्री तिवारी समय-सीमा बैठकों में अभियान की नियमित समीक्षा करते हैं। यही कारण है कि अभियान के बेहतर परिणाम तेजी से सामने आ रहे हैं।जिले में कुल 4 हजार 146 कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिनमें से अब तक 3 हजार 12 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। यह कुल लक्ष्य का लगभग 72.65 प्रतिशत है। पूर्ण हुए कार्यों में 1 अमृत सरोवर, 1271 कूप पुनर्भरण (डगवेल रिचार्ज), 1004 खेत तालाब, 208 सिंचाई अधोसंरचना, 53 जल संरचनाओं का रखरखाव, 235 जल संरक्षण एवं 240 वाटरशेड विकास कार्य शामिल हैं।अभियान का प्रभाव अब ग्रामीण जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
खेत तालाबों और जल संरचनाओं के निर्माण से किसानों को सिंचाई के बेहतर साधन उपलब्ध होने की उम्मीद जगी है। वहीं भू-जल स्तर में सुधार और वर्षा जल संरक्षण की दिशा में भी यह अभियान महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।अभियान के तहत म.प्र. जन अभियान परिषद का कार्य भी सराहनीय है। परिषद के सहयोग एवं मार्गदर्शन से ग्रामीण श्रमदान के माध्यम से नदी एवं तालाबों की नियमित साफ-सफाई कर रहें हैं। साथ ही परिषद द्वारा चौपाल आयोजित कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है और जल संरक्षण की शपथ दिलाई जा रही है।
प्रशासन का मानना है कि यदि इसी तरह जनभागीदारी बनी रही, तो आने वाले वर्षों में कटनी जिला जल संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश के लिए एक मॉडल के रूप में स्थापित हो सकता है। “जल है तो कल है” की सोच को साकार करता ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ जिले में प्रकृति और भविष्य दोनों को संवारने की दिशा में मजबूत कदम साबित हो रहा है।
#JansamparkMP #CMMadhyaPradesh #DrMohanYadav51 #udaypratapmp #jbpcommissioner #katni #कटनी






अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। पहले आप लिखें!