मधेपुरा:उदाकिशुनगंज हिंदू धर्म में ऐसे कई व्रत हैं जो सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। इन्हीं में से एक वट सावित्री का व्रत है। ये व्रत हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है । इस साल वट सावित्री का व्रत पर्व 16 मई को मनाया जाएगा।सुहागिन महिलाएं इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी और वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा करेंगी।
ऐसा माना जाता है इस दिन व्रत रखने से सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वट सावित्री व्रत के दौरान खासतौर से बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। वट सावित्री व्रत को लेकर सुहागिन महिलाओं के बीच अभी से उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। पूजन सामग्री की खरीदारी एवं नए वस्त्र की खरीद जोर शोर से चल रही है।
वहीं दूसरी ओर नवविवाहिता के लिए वट सावित्री पूजा का खास महत्व माना जाता है। ससुराल से आने वाले पूजन सामग्री , कपड़ा, सुहागिन महिलाओं के लिए भोज की सामग्री आदि भेजी जाती है।जिसे लेकर ये नवविवाहिता वट सावित्री पूजा करती हैं।
बरगद के वृक्ष की पूजा का है धार्मिक महत्व : ऐसा माना जाता है कि बरगद के वृक्ष की तने में भगवान विष्णु, जड़ों में ब्रह्मा और शाखाओं में भगवान शिव विराजमान होते हैं। इस वृक्ष की बहुत सारी शाखाएं नीचे की ओर रहती हैं जिन्हें देवी सावित्री का रूप माना जाता है।
इसलिए ऐसा माना जाता है कि इस वृक्ष की पूजा करने से हमें भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हमारी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। संतान प्राप्ति के लिए भी बहुत सी महिलाएं बरगद के वृक्ष की पूजा करती हैं। ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि के दिन वट वृक्ष की छांव में देवी सावित्री ने अपने पति को पुनः जीवित किया था।
इस दिन से वट वृक्ष की पूजा की जाने लगी। पूजा का समय- पंडित ब्रजेश कुमार झा ने बताया कि इस बार 16 मई को होने वाले वट सावित्री व्रत के दिन पूजन का शुभ मुहूर्त प्रातः 7 बजकर 5 मिनट से लेकर दिन के 1बजकर 40 मिनट तक है। प्रथम मुहुर्त अति विशिष्ट मुहूर्त है ।







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