मध्य प्रदेश:समुदाय को हीट वेव के प्रकोप से बचाव हेतु एडवायजरी जारी,बढ़ती गर्मी में हीट स्ट्रोक से बचें

By Gaurav Kabir

Published on: 9 घंटे पहले

कटनी – भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी मौसमी दृष्टिकोण के अनुसार प्रदेश सहित समस्त मध्य भारत में तापमान औसत से अधिक होने की संभावना के दृष्टिगत जन समुदाय को हीट वेव के प्रकोप से बचाव

कटनी – भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी मौसमी दृष्टिकोण के अनुसार प्रदेश सहित समस्त मध्य भारत में तापमान औसत से अधिक होने की संभावना के दृष्टिगत जन समुदाय को हीट वेव के प्रकोप से बचाव हेतु कलेक्‍टर श्री आशीष तिवारी ने एडवायजरी जारी की है।

हीटवेव के प्रभाव, लक्षण एवं प्राथमिक उपचार:-

हीटवेव की वजह से सन बर्न होने पर त्वचा पर लाल चकता, सूजन, फफोले, बुखार, सिरदर्द आदि लक्षण दिखते हैं। ऐसी स्थिति में प्राथमिक उपचार के रूप में प्रभावित को बार-बार नहलाए। यदि फफोले निकल आएं हो तो स्टरलाइज ड्रेसिंग करें। चिकित्सक का परामर्श ले।

ताप के कारण शारीरिक ऐठन होंने पर पैरों, पेट की मांसपेसियों भागों में तकलीफ देह ऐंठन, अत्यधिक पसीना आता है। इसी प्रकार अत्यधिक थकावट एवं शारीरिक खिचाव होने पर अत्यधिक पसीना आना, कमजोरी महसूस होना, शरीर ठंडा होना तथा पीला पड़ जाना, सिर दर्द, नब्ज कमजोर पड़ जाना, मूर्छित हो जाना, उल्टी आना जैसे लक्षण नजर आते हैं। ऐसे में प्रभावित को छायादार स्थल पर तत्काल ले जाए। एैंठन वाले शरीर के भाग को जोर से दबाए तथा धीरे-धीरे सहलाएं। प्रभावित को शीतल जल, छाछ अथवा पना पिलाएं। यदि उकबाई आ रही हो, तो शीतल पेय पिलाना बंद कर दें तथा तत्काल नजदीकी प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र पर ले जाएं।

ताप-दाह में अत्यधिक बुखार, अत्यधिक गर्म एवं सूखी त्वचा, तेज नब्ज बेहोशी हो सकती है। प्रभावित व्यक्ति को पसीना नहीं आएगा। यह अत्यंत चिंताजनक एवं चिकित्सा की दृष्टि से आपात स्थिति है। तत्काल 108 को बुलाएँ तथा प्रभावित को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराएँ। एम्बूलेंस आने तक उन्हें किसी शीतल वातानुकूलित स्थान पर ले जाएँ। कपड़ों को दीला कर आरामदेह स्थिति में लिटाएँ। उनके शरीर पर ठंडा एवं गीले कपड़े से स्पंजिंग करें। किसी भी प्रकार का पेय पदार्थ पीनें को नहीं दें। आवश्यकतानुसार सीपीआर शुरू करें।

हीट वेव से बचाव हेतु ये सावधानियां अपनाये:-

पानी, छांछ, ओ.आर.एस. का घोल या घर में बने पेय जैसे लस्सी, नीबू पानी, आम का पना इत्यादि का सबन कर तरो-ताजा रहें। यथा संभव दोपहर 12 से 4 बजे धूप में बाहर निकलने से बचें। धूप में निकलते समय अपना सिर ढ़क कर रखें। कपड़े, टोपी अथवा छतरी का उपयोग करें। धूप में निकलने के पूर्व तरल पदार्थ का सेवन करें। पानी हमेशा साथ रखें। शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें। सूती, दीले एवं आरामदायक कपड़े पहने सिंथेटिक एवं गहरे रंग के वस्‍त्र पहनने से बचें। जानवरों को छांव में रखें और पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी दें। अत्यधिक गर्मी होने की स्थिति में ठंडे पानी से शरीर को पोछे या कई बार स्नान करें। धूप तथा गर्म हवाओं के संपर्क के तुरंत बाद स्नान न करें। गरिष्ठ, वसायुक्त, ज्यादा प्रोटीन वाले भोजन तथा अल्कोहल, चाय, काफी जैसे पेय पदार्थ का उपयोग कम से कम करें।

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