सिवनी/ कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा जिले के कृषकों से खरीफ मौसम में वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया गया है। सहायक कृषि यंत्री, कृषि अभियांत्रिकी उपसंभाग सिवनी ने बताया कि जिले में खरीफ की प्रमुख फसल मक्का का उत्पादन प्रायः मेढ़-नाली पद्धति से किया जाता है। मक्का की तुड़ाई के बाद खेतों में शेष फसल अवशेष (नरवाई) के प्रभावी प्रबंधन के लिए मोबाइल श्रेडर यंत्र का उपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि मोबाइल श्रेडर मेढ़ पर बचे हुए फसल अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में बिखेर देता है, जिन्हें बाद में कल्टीवेटर की सहायता से मिट्टी में आसानी से मिलाया जा सकता है। इससे खेत की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होती है तथा नरवाई जलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
मोबाइल श्रेडर के प्रभावी उपयोग के लिए लगभग 3 फीट चौड़ी मेढ़ पर अधिकतम दो कतारों में मक्का की बुवाई तथा कतार से कतार के बीच 12 इंच की दूरी रखना उपयुक्त है। विभाग ने कृषकों से निर्धारित मापदंडों के अनुसार मेढ़ बनाकर मक्का की बुवाई करने का अनुरोध किया है, जिससे फसल अवशेष प्रबंधन सुगमता से किया जा सके।
इसके साथ ही धान उत्पादक क्षेत्रों के किसानों से धान की बुवाई में डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक अपनाने का आग्रह किया गया है। इस तकनीक से श्रम, लागत एवं समय की बचत होती है तथा खेती अधिक लाभकारी बनती है। CM Madhya Pradesh Department of Agriculture, Madhya Pradesh #seoni Jansampark Madhya Pradesh







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