​डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: पीएम मोदी ने किया नमन, कहा- ‘अनुच्छेद 370 हटाना उनकी शहादत को सच्ची श्रद्धांजलि’

By Gaurav Kabir

Published on: अभी-अभी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। पीएम मोदी ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने, उनके औद्योगिक विजन और भारतीय जनसंघ की स्थापना में उनके योगदान को याद किया। पढ़ें पूरी खबर।

दिल्ली,गौरव कबीर,न्यूज़96इंडिया

नई दिल्ली: आज, 6 जुलाई को पूरा देश डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती (Dr. Syama Prasad Mookerjee 125th Birth Anniversary) मना रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक विशेष लेख के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम मोदी ने डॉ. मुखर्जी को साहस, बुद्धि और ‘माँ भारती’ के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 (Article 370) को हटाना डॉ. मुखर्जी के सर्वोच्च बलिदान को सबसे सच्ची श्रद्धांजलि थी।

पीएम मोदी की मुख्य बातें:-

  • अखंड भारत के रक्षक: विभाजन के समय पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने में डॉ. मुखर्जी की भूमिका अहम थी।
  • शिक्षाविद के रूप में योगदान: वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने और शिक्षा को ‘क्लर्क पैदा करने वाली फैक्ट्री’ से आगे ले जाने का विजन रखा।
  • पहले उद्योग मंत्री: स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग मंत्री के तौर पर उन्होंने सिंदरी उर्वरक संयंत्र और दामोदर घाटी निगम जैसी नींव रखी।
  • भारतीय जनसंघ की स्थापना: कांग्रेस के विकल्प के रूप में सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी पार्टी बनाई, जिसका चुनाव चिह्न ‘दीया’ था।

अखंड भारत और कश्मीर के लिए सर्वोच्च बलिदान

​प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में याद दिलाया कि किस तरह डॉ. मुखर्जी ने देश की अखंडता के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। पश्चिम बंगाल को बचाने के बाद उनका विजन जम्मू-कश्मीर की ओर गया। पीएम मोदी ने लिखा, “कारावास ने उन्हें हतोत्साहित नहीं किया और अलगाव ने उन्हें कमजोर नहीं किया। 2019 में अनुच्छेद 370 और 35(A) को रद्द करना उनकी शहादत के प्रति सबसे सच्ची श्रद्धांजलि थी।”

कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति का शैक्षिक विजन

​सर आशुतोष मुखर्जी के पुत्र होने के बावजूद, डॉ. मुखर्जी ने सुख-सुविधाओं के बजाय राष्ट्र-सेवा चुनी। कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में उन्होंने 24 जनवरी को विश्वविद्यालय स्थापना दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की और गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर से विश्वविद्यालय के लिए गीत लिखने का आग्रह किया। उनका मानना था कि छात्रों को केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि राष्ट्र का नेतृत्व करने वाला बनना चाहिए।

भारत के पहले उद्योग मंत्री और सिंदरी प्लांट का पुनरुद्धार

​देश के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री के रूप में, डॉ. मुखर्जी ने कुटीर उद्योगों और पारंपरिक कारीगरों के साथ-साथ आधुनिक औद्योगिक भारत की नींव रखी। पीएम मोदी ने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे डॉ. मुखर्जी द्वारा स्थापित सिंदरी उर्वरक संयंत्र (Sindri Fertilizer Plant) को दशकों तक नजरअंदाज किया गया, लेकिन वर्तमान सरकार को इसके पुनरुद्धार का अवसर मिला, जो पीएम के लिए एक बेहद खास पल था।

अभिव्यक्ति की आज़ादी के पक्षधर और मानवतावादी

​75 साल पहले जब पंडित नेहरू पहला संविधान संशोधन लाए थे, तब डॉ. मुखर्जी ने अभिव्यक्ति की आज़ादी पर इसे सीधा हमला बताते हुए कड़ा विरोध किया था। इसके अलावा, 1943 के भयंकर बंगाल अकाल (Bengal Famine) और 1942 के मेदिनीपुर चक्रवात के दौरान उन्होंने राहत केंद्रों के जरिए मानवता की अभूतपूर्व सेवा की। अंग्रेजों की संवेदनहीनता पर उन्होंने ‘पंचासेर मन्वंतर’ नामक किताब भी लिखी।

युवाओं से ‘विकसित भारत’ के लिए आह्वान

​पीएम मोदी ने युवाओं के लिए डॉ. मुखर्जी के संदेश को दोहराया: “आप जो भी काम करें, उसे गंभीरता से, पूरी तरह से और अच्छी तरह से करें।” लेख के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे भारत विकसित भारत (Viksit Bharat) की ओर बढ़ रहा है, देश को मजबूत, एकजुट और आत्मविश्वासी बनाना ही डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को हमारी सबसे अच्छी श्रद्धांजलि होगी।

💬 Comments
?

No comments yet. Be the first to comment!

खबरें और भी arrow-right Created with Sketch Beta.