सिवनी: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 को लेकर जिला स्तरीय बैठक, स्रोत स्तर पर कचरा अलग करने और डोर-टू-डोर कलेक्शन पर जोर

By Gaurav Kabir

Published on: अभी-अभी

​सिवनी (मध्य प्रदेश)। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जिले में स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को कलेक्टर सभाकक्ष में एक उच्च स्तरीय जिला स्तरीय समीक्षा

सिवनी (मध्य प्रदेश)।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जिले में स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को कलेक्टर सभाकक्ष में एक उच्च स्तरीय जिला स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रभारी कलेक्टर श्री अनिल कुमार राठौर ने की।

​इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मालती डेहरिया, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जिला पंचायत श्रीमती अंजली शाह सहित विभिन्न जनपद एवं नगरीय निकायों के अधिकारी और जनप्रतिनिधिगण मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

स्रोत स्तर (Source) पर ही अलग करना होगा सूखा और गीला कचरा

​बैठक में जिले की कार्ययोजनाओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए प्रभारी कलेक्टर श्री अनिल कुमार राठौर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्रोत स्तर (घर/दुकान) पर ही कचरे का पृथक्करण (Segregation) सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने नियमित डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाने को कहा।

कलेक्टर का संदेश: “स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए आम जनता में जनजागरूकता बढ़ाना सबसे ज्यादा जरूरी है।”

कचरा जलाने और खुले में फेंकने पर लगेगी प्रभावी रोक

​प्रभारी कलेक्टर ने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देशित किया कि खुले में कचरा फेंकने और उसे जलाने जैसी गतिविधियों पर तत्काल और प्रभावी रोक लगाई जाए। ऐसी गतिविधियों से न केवल प्रदूषण फैलता है बल्कि पर्यावरण को भी भारी नुकसान होता है। उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी सभी सरकारी परिसंपत्तियों की नियमित मॉनिटरिंग करने के भी निर्देश दिए।

कम्पोस्ट और बायो-मिथेनेशन इकाइयों की होगी स्थापना

​जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्रीमती अंजली शाह ने बैठक में आगामी वर्षों के लिए तैयार रोडमैप की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जिले में:

  • ​बुनियादी अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना (Infrastructure) का विकास किया जा रहा है।
  • ​जैविक कचरे के निपटारे के लिए कम्पोस्ट और बायो-मिथेनेशन इकाइयों (Bio-Methanation Units) की स्थापना तेजी से की जाएगी।
  • ​पुराने डंपिंग साइट्स (कचरा स्थलों) का वैज्ञानिक तरीके से बायो-रेमीडिएशन (निस्तारण) किया जा रहा है।
  • ​पूरे जिले की स्वच्छता गतिविधियों की ऑनलाइन ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है।

​प्रभारी कलेक्टर ने सभी संबंधित अधिकारियों को इस समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्ययोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने की हिदायत दी।

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