ज्ञान भारतम पाण्डुलिपि मिशन में सिवनी की उल्लेखनीय उपलब्धि,अब तक 133 दुर्लभ पाण्डुलिपियाँ को चिन्हित कर किया गया डिजिटाइजेशन

By Gaurav Kabir

Published on: अभी-अभी

जिलेवासियों से निजी संग्रहों की जानकारी साझा करने की अपील सिवनी :भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञान भारतम पाण्डुलिपि मिशन” के अंतर्गत सिवनी जिले में पाण्डुलिपि सर्वेक्षण एवं संरक्षण अभियान तेजी से संचालित

जिलेवासियों से निजी संग्रहों की जानकारी साझा करने की अपील

सिवनी :भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञान भारतम पाण्डुलिपि मिशन” के अंतर्गत सिवनी जिले में पाण्डुलिपि सर्वेक्षण एवं संरक्षण अभियान तेजी से संचालित किया जा रहा है। जिले की ऐतिहासिक, धार्मिक, साहित्यिक एवं बौद्धिक धरोहरों को खोजने और संरक्षित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे इस विशेष अभियान को प्रारंभिक चरण में ही उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है।

जिला प्रशासन सिवनी एवं जिला पुरातत्व संग्रहालय के संयुक्त प्रयासों से अब तक जिले के विभिन्न धार्मिक स्थलों, मंदिरों एवं निजी संग्रहों से कुल 133 प्राचीन पाण्डुलिपियों को चिन्हित कर सफलतापूर्वक “ज्ञान भारतम एप” पर अपलोड किया जा चुका है।

इन पाण्डुलिपियों में लगभग 150 से 250 वर्ष पुरानी हस्तलिखित पोथियाँ, पुराण, धार्मिक ग्रंथ तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं।

इन पाण्डुलिपियों का डिजिटलीकरण होने से न केवल उनकी मूल सामग्री सुरक्षित रह सकेगी, बल्कि शोध, अध्ययन एवं भावी पीढ़ियों के लिए भी ज्ञान का एक महत्वपूर्ण स्रोत उपलब्ध होगा।

जिले में अब तक चिन्हित पाण्डुलिपियों में दिगम्बर जैन मंदिर सिवनी से 70, दिगम्बर जैन मंदिर छपारा से 43, दिगम्बर जैन मंदिर लखनादौन से 14 जैन धर्म संबंधली पाण्‍डुलिपी प्राप्‍त हुई है।

इसी तरह ग्राम गोहना से 1 कुरान की आयतें तथा डूंडासिवनी के निजी संग्रह से 5 रामचरित मानस की चौपाई की पाण्‍डुलिपी शामिल हैं। इस प्रकार कुल 133 पाण्डुलिपियों को जिला पुरातत्व संग्रहालय सिवनी द्वारा डिजिटल संरक्षण की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।

कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना के मार्गदर्शन में गठित सर्वेक्षण दल द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर संपर्क, सर्वेक्षण एवं दस्तावेजीकरण का कार्य किया जा रहा है।

अभियान के दौरान एडवोकेट इकबाल मोहम्मद खान, सेवानिवृत्त प्राचार्य श्री डी.एस. श्रीवास्तव, ग्राम गोहना के श्री साहेब मोहम्मद खान सहित विभिन्न जैन मंदिरों के पदाधिकारियों एवं निजी संग्राहकों से संपर्क स्थापित कर पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण किया गया।

कलेक्‍टर श्रीमती मीना ने बताया कि सिवनी जिले की छिपी हुई ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को खोजकर संरक्षित करना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने कहा कि जिले के प्रत्येक नगर एवं गाँव में विशेष सर्वेक्षण अभियान संचालित किया जाएगा। इसके अंतर्गत प्राचीन गढ़ियों, मठों, मंदिरों, धार्मिक संस्थानों, पुस्तकालयों एवं निजी संग्रहों में सुरक्षित पाण्डुलिपियों की पहचान कर उन्हें “ज्ञान भारतम एप” पर पंजीकृत किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में प्रदेश के सभी जिलों को 30 जून तक विशेष अभियान चलाकर सांस्कृतिक एवं बौद्धिक धरोहरों के संरक्षण के निर्देश दिए गए हैं।

इसी क्रम में सिवनी जिले में भी अभियान को जनभागीदारी से जोड़ते हुए व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है।कलेक्टर श्रीमती मीना ने कहा कि अनेक परिवारों एवं संस्थाओं के पास पीढ़ियों से सुरक्षित हस्तलिखित दस्तावेज, पुराने पत्राचार, जिले में धार्मिक ग्रंथ, वंशावली अभिलेख, साहित्यिक रचनाएँ, राजकीय आदेश, ऐतिहासिक दस्तावेज एवं अन्य पाण्डुलिपियाँ उपलब्ध हो सकती हैं, जिनका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जानकारी के अभाव में ऐसे बहुमूल्य दस्तावेज समय के साथ नष्ट होने की स्थिति में पहुँच जाते हैं। उन्होंने जिलेवासियों से अपील की है कि यदि उनके घर, परिवार, संस्था अथवा निजी संग्रह में 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी कोई हस्तलिखित पाण्डुलिपि, अभिलेख, पत्राचार, साहित्यिक ग्रंथ या अन्य ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो उनकी जानकारी जिला प्रशासन को अवश्य दें।

नागरिक स्वयं “ज्ञान भारतम एप” के माध्यम से अपनी पाण्डुलिपियों का पंजीकरण कर सकते हैं अथवा जिला स्तरीय कंट्रोल रूम के मोबाइल नंबर 7000478932 पर संपर्क कर सकते हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल पाण्डुलिपियों का डिजिटल संरक्षण और दस्तावेजीकरण करना है।

मूल पाण्डुलिपियाँ संबंधित व्यक्ति, परिवार या संस्था के पास ही सुरक्षित रहेंगी। डिजिटलीकरण के माध्यम से उनकी सामग्री को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाएगा। सिवनी जिले में अभियान के प्रारंभिक चरण में प्राप्त सफलता यह दर्शाती है कि जिले में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियों का समृद्ध भंडार मौजूद है।

आवश्यकता केवल उन्हें खोजने, पहचानने और संरक्षित करने की है।जिला प्रशासन ने जिलेवासियों से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता की अपील करते हुए कहा है कि सिवनी की गौरवशाली ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। आपकी एक छोटी-सी पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

CM Madhya Pradesh Jansampark Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav #seoni

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