केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर ‘किसान यात्रा एवं पशुधन संवर्धन सम्मेलन’ का सफल आयोजन

By Gaurav Kabir

Published on: अभी-अभी

​पशुपालन एवं कृषि विभाग ने प्राकृतिक खेती और राष्ट्रीय गोकुल मिशन को दिया बढ़ावा ​केंद्र सरकार के 12 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक राज्यव्यापी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान

पशुपालन एवं कृषि विभाग ने प्राकृतिक खेती और राष्ट्रीय गोकुल मिशन को दिया बढ़ावा

​केंद्र सरकार के 12 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक राज्यव्यापी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग द्वारा उपनिदेशक कार्यालय परिसर में ‘किसान यात्रा एवं पशुधन संवर्धन सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों और पशुपालकों को सरकारी योजनाओं का लाभ और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देना था।

कृषि एवं पशुपालन हैं एक-दूसरे के पूरक

​कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग के उपनिदेशक डॉ. सुखविंदर सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि कृषि और पशुपालन दोनों एक-दूसरे के पूरक (Complementary) हैं।

  • योजनाओं का प्रचार-प्रसार: उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए कि दोनों विभागों की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर किसानों और पशुपालकों तक पहुंचना चाहिए।
  • पर्यावरण संरक्षण की पहल: डॉ. चौहान ने कार्यालय परिसर में पौधारोपण किया।
  • सामग्री वितरण: मौके पर उपस्थित किसानों एवं पशुपालकों को विभागीय योजनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण प्रचार सामग्री भी वितरित की गई।

प्राकृतिक खेती से घटेगी कृषि लागत

​सम्मेलन में खंड कृषि अधिकारी डॉ. जयकुमार भौरिया ने किसानों को कृषि की उन्नत और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों से अवगत कराया। उन्होंने मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:

  • पर्यावरण संरक्षण: कृषि लागत कम करने तथा पर्यावरण को बचाने के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान।
  • कीटों की पहचान: फसलों में मित्र एवं शत्रु कीटों की पहचान करने के तरीके।
  • उन्नत तकनीकें: धान की सीधी बुवाई (DSR) और देसी कपास की खेती के फायदे।
  • जैविक खाद: खेतों में जीवामृत एवं घनजीवामृत के उपयोग की विधि और लाभ।

राष्ट्रीय गोकुल मिशन और दुग्ध उत्पादन पर विशेष जोर

​उपमंडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र सिंह लोहट ने पशुधन के विकास और स्वास्थ्य को लेकर विस्तार से जानकारी दी।

  • दूध उत्पादन: उन्होंने पशुपालकों को दूध उत्पादन बढ़ाने की वैज्ञानिक विधियां बताईं।
  • नस्ल सुधार: पशुधन की नस्ल सुधार गतिविधियों के लाभों पर चर्चा की।
  • राष्ट्रीय गोकुल मिशन: इस महत्वपूर्ण मिशन के तहत देशी पशुधन (Indigenous Cattle) के संरक्षण एवं संवर्धन के बारे में पशुपालकों को जागरूक किया।
  • स्वास्थ्य सेवाएं: विभाग द्वारा पशुओं के लिए उपलब्ध करवाई जा रही विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी दी गई।

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