मधेपुरा की बेटी नैयनसी कुमारी ने 70वीं BPSC में लहराया परचम, बिना कोचिंग बनीं राजस्व पदाधिकारी (RO)

By Gaurav Kabir

Published on: अभी-अभी

मधेपुरा जिले के मुरलीगंज की नैयनसी कुमारी ने बिना कोचिंग 70वीं BPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर राजस्व पदाधिकारी (RO) का पद पाया है। पढ़ें उनकी संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी।

मधेपुरा (मुरलीगंज):

दृढ़ इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत हो तो सफलता के रास्ते में सीमित संसाधन कभी बाधा नहीं बन सकते। इस बात को सच कर दिखाया है मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड की होनहार बेटी नैयनसी कुमारी ने। हाल ही में घोषित हुए 70वीं BPSC परीक्षा (70th BPSC Result) में नैयनसी ने शानदार सफलता हासिल करते हुए राजस्व पदाधिकारी (Revenue Officer – RO) का पद प्राप्त किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से पूरे क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है।

सेल्फ स्टडी से तय किया सफलता का सफर

​एक सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक की पुत्री नैयनसी का यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने अपनी तैयारी के लिए किसी बड़े शहर या महंगी कोचिंग का सहारा नहीं लिया।

  • चौथा प्रयास: यह सफलता उन्हें उनके चौथे प्रयास में मिली, जो उनके असीम धैर्य को दर्शाता है।
  • बिना कोचिंग के तैयारी: नैयनसी ने अपनी पूरी तैयारी सेल्फ स्टडी (Self Study) और ऑनलाइन संसाधनों के माध्यम से की।
  • अनुशासन बना हथियार: सीमित संसाधनों के बावजूद, घर पर रहकर सख्त दिनचर्या और अनुशासन के बल पर उन्होंने राज्य की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा को पास कर दिखाया।

मुरलीगंज में जश्न का माहौल

​नैयनसी के BPSC क्रैक करने और राजस्व पदाधिकारी (RO) बनने की खबर जैसे ही मुरलीगंज पहुंची, पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया है। परिवार, गुरुजनों और ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर इस ऐतिहासिक पल का जश्न मनाया।

ग्रामीण बेटियों के लिए बनीं मिसाल

​नैयनसी कुमारी की सफलता केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जीत है। उनकी इस उपलब्धि से प्रेरित होकर मुरलीगंज और आसपास के ग्रामीण इलाकों की कई छात्राएं अब सिविल सेवा की तैयारी की ओर आकर्षित हो रही हैं।

नैयनसी का संदेश:

अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को देते हुए नैयनसी ने युवाओं को खास संदेश दिया। उन्होंने कहा, “अगर मेहनत और धैर्य के साथ सही दिशा में प्रयास किया जाए, तो दुनिया का कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।”

​ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने की उनकी यह कहानी आज हर उस युवा के लिए एक बड़ी मिसाल बन गई है, जो संसाधनों की कमी के बावजूद कुछ बड़ा करने का सपना देखता है।

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