नई दिल्ली/राजस्थान: “मेरे बेटे का क्या कसूर था?” यह चीख उस मां की है, जिसका बेटा प्रदीप मेघवाल अब इस दुनिया में नहीं है। NEET पेपर लीक की धांधली और भ्रष्टाचार से आहत होकर होनहार छात्र प्रदीप मेघवाल ने आत्महत्या कर ली। यह केवल एक छात्र की मृत्यु नहीं है, बल्कि देश की जर्जर और भ्रष्ट परीक्षा प्रणाली द्वारा की गई एक ‘व्यवस्थागत हत्या’ है।
पीड़ित परिवार का छलका दर्द: “सपना नहीं, घर का चिराग बुझ गया”
आज जब प्रदीप के परिवार से मुलाकात हुई, तो वहां का मंजर दिल दहला देने वाला था। एक साधारण परिवार ने अपने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए अपनी जमा-पूंजी लगा दी थी, लेकिन सिस्टम के माफियाओं ने उनके सपनों को नीलाम कर दिया।
”प्रदीप की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि उस टूटी हुई व्यवस्था की देन है जिसने परीक्षा की शुचिता को माफियाओं के पैरों तले रौंद दिया है।”
मोदी-प्रधान सरकार पर तीखा हमला
इस घटना ने सीधे तौर पर केंद्र की मोदी-प्रधान (धर्मेंद्र प्रधान) की जोड़ी को कठघरे में खड़ा कर दिया है। पेपर लीक की घटनाओं ने साबित कर दिया है कि देश की परीक्षा प्रणाली अब छात्रों के हाथ में नहीं, बल्कि शिक्षा माफियाओं के कब्जे में है।
- जवाबदेही किसकी? लाखों बच्चों का भविष्य दांव पर लगाकर कुर्सी से चिपके जिम्मेदार लोग आज भी मौन हैं।
- भ्रष्ट तंत्र: पेपर लीक होने से सिर्फ परीक्षा रद्द नहीं होती, बल्कि मध्यमवर्गीय परिवारों का भरोसा और सालों की मेहनत टूट जाती है।
- मानसिक दबाव: देश के युवा आज प्रतियोगिता से ज्यादा इस बात से डरे हुए हैं कि उनकी मेहनत पर भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़ जाए।
मुख्य बिंदु: क्यों सुलग रहा है आक्रोश?
- शिक्षा माफिया का बोलबाला: बार-बार होते पेपर लीक सरकार की विफलता का प्रमाण हैं।
- छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य: भविष्य की अनिश्चितता युवाओं को आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर रही है।
- न्याय की मांग: प्रदीप मेघवाल का परिवार और देश के लाखों छात्र इस भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ जवाबदेही और न्याय मांग रहे हैं।






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