आज पटना के अधिवेशन भवन में शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला-सह-चिंतन शिविर को सफलतापूर्वक संबोधित किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर “खेलेगा बिहार, पढ़ेगा बिहार” के विजन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत खेल-समेकित शिक्षा (Sports Integration) पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई।
हमारा मुख्य लक्ष्य खेल को केवल पाठ्येतर (Extracurricular) गतिविधि तक सीमित न रखकर, इसे शिक्षा की मुख्यधारा का अभिन्न हिस्सा बनाना है।
बिहार सरकार की प्रमुख खेल पहलें और योजनाएं
खेल और शिक्षा के विकास को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
- ‘मशाल’ प्रतिभा खोज अभियान: विद्यालय स्तर पर ही खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उनके विकास की रूपरेखा तैयार करना।
- बिहार खेल विश्वविद्यालय, राजगीर: इस विश्वविद्यालय के माध्यम से खेल विज्ञान, शारीरिक शिक्षा और खेल प्रबंधन में उच्च शिक्षा व प्रशिक्षण प्रदान करना।
- PET शिक्षकों की नियुक्ति: विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा (PET) शिक्षकों की चरणबद्ध नियुक्ति और उनका नियमित प्रशिक्षण।
- बुनियादी ढांचे का विकास: विद्यालय के खेल मैदानों का उन्नयन और पंचायत तथा नगर पंचायत स्तर पर खेल क्लबों को सक्रिय करना।
बिहार खेल छात्रवृत्ति योजना (आर्थिक सहायता)
खिलाड़ियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए बिहार खेल छात्रवृत्ति योजना के तहत तीन-स्तरीय सहायता राशि प्रदान की जा रही है:
| योजना का नाम | आर्थिक सहायता (राशि) |
|---|---|
| ‘प्रेरणा’ | ₹3 लाख |
| ‘सक्षम’ | ₹5 लाख |
| ‘उत्कर्ष’ | ₹20 लाख |
‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’: सुरक्षित करियर का संकल्प
खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने के लिए ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ जैसी शानदार पहल शुरू की गई है। इसके माध्यम से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के लिए SDM और DSP जैसे उच्च पदों तक सीधी सरकारी नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया गया है।
यह पहल खेल विभाग, शिक्षा विभाग, SCERT, BEPC और पंचायती राज संस्थाओं के समन्वित प्रयासों का परिणाम है, जो #विकसितबिहार के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।






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