चियासीड की खेती से बदली किसान रंजीत बघेल की तकदीरऔषधीय फसलों से कमा रहे लाखों का मुनाफा

By Gaurav Kabir

Published on: June 10, 2026

जिले के ग्राम जैतपुरकला के प्रगतिशील कृषक श्री रंजीत बघेल औषधीय फसलों की खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रहे हैं। 10 एकड़ कृषि भूमि के स्वामी श्री बघेल पहले परंपरागत रूप से

जिले के ग्राम जैतपुरकला के प्रगतिशील कृषक श्री रंजीत बघेल औषधीय फसलों की खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रहे हैं।

10 एकड़ कृषि भूमि के स्वामी श्री बघेल पहले परंपरागत रूप से गेहूं एवं मक्का की खेती करते थे। इन फसलों में प्रति एकड़ 20 से 25 हजार रुपये की लागत आती थी, जबकि शुद्ध आय मात्र 15 से 18 हजार रुपये प्रति एकड़ ही प्राप्त होती थी।

कृषि आय बढ़ाने की इच्छा लेकर श्री बघेल ने उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन और तकनीकी सलाह के आधार पर उन्होंने अपनी 5 एकड़ भूमि में चियासीड की खेती करने का निर्णय लिया।

नवंबर माह में बुवाई कर उन्होंने आधुनिक तकनीकों के अनुसार फसल तैयार की।श्री बघेल बताते हैं कि चियासीड की खेती अपेक्षाकृत आसान है।

इसमें अधिक देखभाल या रासायनिक उपयोग की आवश्यकता नहीं होती तथा केवल 4 से 5 सिंचाई में फसल तैयार हो जाती है। एक एकड़ में इसकी खेती पर लगभग 15 से 20 हजार रुपये का खर्च आता है।

अप्रैल माह में फसल की कटाई के बाद उन्हें प्रति एकड़ लगभग 7 क्विंटल चियासीड बीज का उत्पादन प्राप्त हुआ। स्थानीय बाजार में विक्रय करने पर उन्हें करीब 1.20 लाख रुपये प्रति एकड़ शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जो पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना अधिक है।

उद्यानिकी विभाग के अनुसार चियासीड एक लोकप्रिय सुपर फूड है, जिसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, हृदय स्वास्थ्य को मजबूत करने, वजन नियंत्रित रखने तथा ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित करने में सहायक माना जाता है।

चियासीड की खेती से मिले उत्कृष्ट परिणामों से उत्साहित श्री रंजीत बघेल अब क्षेत्र के अन्य किसानों को भी औषधीय फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

आगामी सीजन में वे अपनी भूमि के साथ अन्य किसानों से लीज पर जमीन लेकर लगभग 15 एकड़ में चियासीड की खेती करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके साथ ही खेतों की मेढ़ों पर औषधीय फसल सफेद कौंच लगाने की भी योजना बना रहे हैं।श्री बघेल की यह सफलता दर्शाती है कि आधुनिक तकनीक, विभागीय मार्गदर्शन और नवाचार को अपनाकर किसान कम लागत में अधिक लाभ अर्जित कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकते हैं।

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