मखाना खेती करके आत्मनिर्भर हो रहे मधेपुरा के किसान

By Gaurav Kabir

Published on: May 5, 2026

कुमारखण्ड प्रखंड क्षेत्र में अब धीरे धीरे मखाना खेती को लेकर किसानों की रुचि बढ़ने लगी है। खासकर जलजमाव वाले सैकड़ों एकड़ खेतों में मखाना खेती की जाने लगी है।प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत परमानंदपुर, मंगरवाडा पंचायत में चाप ( जलजमाव वाले जमीन) में खासकर स्थानीय व बाहर से आकर लीज पर जमीन लेकर मखाना की खेती

कुमारखण्ड प्रखंड क्षेत्र में अब धीरे धीरे मखाना खेती को लेकर किसानों की रुचि बढ़ने लगी है। खासकर जलजमाव वाले सैकड़ों एकड़ खेतों में मखाना खेती की जाने लगी है।प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत परमानंदपुर, मंगरवाडा पंचायत में चाप ( जलजमाव वाले जमीन) में खासकर स्थानीय व बाहर से आकर लीज पर जमीन लेकर मखाना की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है।

मालूम हो कि इन खेलों में अब से पहले धान की खेती ही की जा रही थी। लेकिन पिछले एक दो साल से मखाना खेती को लेकर किसानों का रुझान बढ़ा है और सैकड़ों एकड़ में मखाना खेती की जाने लगी है।

इसके पीछे एक बड़ी वजह है कि धान से सालाना कमाई प्रति एकड़ 15 से 20 हजार रुपए तक हो रही थी, लेकिन मखाना से 40 से 50 हजार रुपए तक प्रति एकड़ कमाई हो रही है।

जिसके कारण किसान इसको ज्यादा लाभदायक मानकर इसकी खेती करने के लिए प्रेरित हुए हैं। वैसे मखाना खेती में किसानों को कुछ परेशानी का सामना करना पड़ता है।

जिसमें खासकर पानी की सबसे ज्यादा जरुरत इस खेती में होती है और पानी के लिए किसान को पंपसेट का सहारा लेना पड़ता है। खेतों तक बिजली आपूर्ति नहीं रहने से पंपसेट से काम चलाना पड़ रहा है जो ज्यादा मंहगी साबित हो रही है।

इस जलीय फसल को जनवरी से फरवरी में खेतों में लगाया जाता है और जुलाई से अगस्त में फसल तैयार हो जाते हैं।

इस संबंध में कृषि कोर्डिनेटर सुमन सौरभ ने बताया कि मखाना खेती किसानों के लिए लाभकारी है और सरकार द्वारा इस खेती के लिए 75 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान भी है।

जिसका लाभ किसानों द्वारा लेकर इस खेती को करके अपने आपको ज्यादा समृद्ध किया जा सकता है।

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