श्योपुर: मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में आगामी गर्मियों और गिरते भूजल स्तर को देखते हुए प्रशासन ने बेहद सख्त कदम उठाए हैं। श्योपुर कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा द्वारा पेयजल परिरक्षण अधिनियम के तहत आमजन को पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूरे श्योपुर जिले को आगामी आदेश तक जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया गया है।
इस बड़े फैसले के तहत अब पूरे जिले में नए नलकूपों (Tube-wells) के खनन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
बिना अनुमति नलकूप खोदा तो होगी 2 वर्ष की जेल
कलेक्टर द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, जिले का कोई भी नागरिक बिना पूर्व अनुमति के जल स्रोतों का व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं कर पाएगा:
- घरेलू उपयोग को छूट: कोई भी व्यक्ति बिना प्रशासनिक अनुमति के जल अभावग्रस्त क्षेत्र में किसी भी जल स्रोत से घरेलू काम को छोड़कर अन्य किसी काम के लिए पानी नहीं ले सकेगा।
- SDM की अनुमति अनिवार्य: नए नलकूप या बोरवेल खोदने के लिए संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय दण्डाधिकारी (SDM) से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
- कड़े दंड का प्रावधान: यदि कोई भी व्यक्ति पेयजल परिरक्षण अधिनियम के नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसे 02 वर्ष के कारावास (जेल) की सजा भुगतनी होगी।
पेयजल विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के अवकाश पर रोक
नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की सप्लाई निर्बाध रूप से चालू रहे, इसके लिए कलेक्टर ने अधिकारियों की छुट्टियों पर कैंची चला दी है।
- पीएचई (PHE) और मैदानी स्टाफ अलर्ट पर: पेयजल संबंधी समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के अधिकारियों और कर्मचारियों के अवकाश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
- नगरीय निकाय भी पाबंद: इसके साथ ही जनपद पंचायतों एवं नगरीय निकायों के मैदानी अमले की छुट्टियों को भी पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है ताकि फील्ड पर पानी की किल्लत की तुरंत निगरानी हो सके।
भूजल स्तर सुधारने के लिए शुरू हुआ “सजल धरा अभियान”
एक तरफ जहां पानी के दोहन पर रोक लगाई गई है, वहीं दूसरी तरफ वर्षा जल को सहेजने के लिए जिले में “सजल धरा अभियान” की शुरुआत की गई है। कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा ने जिले के सभी प्रमुख शासकीय एवं अर्द्धशासकीय भवनों में प्राथमिकता के आधार पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (Rainwater Harvesting System) बनाने के निर्देश दिए हैं।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बारिश के पानी का अधिक से अधिक भूमि में संग्रहण करना है ताकि श्योपुर का वॉटर लेवल सुधर सके।
अभियान के सफल संचालन के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त:
इस बड़े अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी सौंप दी गई है:
| क्षेत्र | नोडल अधिकारी | पद |
|---|---|---|
| ग्रामीण क्षेत्र | श्रीमती सौम्या आनंद | मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जिला पंचायत |
| नगरीय क्षेत्र | श्री रूपेश उपाध्याय | अपर कलेक्टर |
| सहायक नोडल (दोनों क्षेत्र) | श्री एल.पी. सिंह | कार्यपालन यंत्री (EE), पीएचई |







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