सतना: पीएम आवास योजना में गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई, नारायणपुर के ग्राम रोजगार सहायक हटाए गए

By Gaurav Kabir

Published on: May 29, 2026

मध्य प्रदेश के सतना जिले से भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का एक बड़ा मामला सामने आया है। जनपद पंचायत सोहावल के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नारायणपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के लाभ वितरण

मध्य प्रदेश के सतना जिले से भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का एक बड़ा मामला सामने आया है। जनपद पंचायत सोहावल के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नारायणपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के लाभ वितरण में गंभीर अनियमितता की शिकायत पर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। जिला पंचायत सतना के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) व अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक श्री शैलेंद्र सिंह द्वारा आरोपी ग्राम रोजगार सहायक को तत्काल प्रभाव से पद से पृथक कर दिया गया है।

सतना, 26 मई जनपद पंचायत सोहावल की ग्राम पंचायत नारायणपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ वितरण में अनियमितता की शिकायत सामने आने पर अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक एवं मुख्य कार्य पालन अधिकारी जिला पंचायत सतना श्री Shailendra Singh द्वारा कार्रवाई की गई है।

ग्राम रोजगार सहायक अनुज कुमार पयासी को तत्काल प्रभाव से ग्राम पंचायत के शासकीय कार्यों से पृथक कर जनपद पंचायत सोहावल में संबद्ध किया गया है।

ग्राम पंचायत नारायणपुर निवासी दिनेश कुमार गर्ग ने कलेक्टर के समक्ष जनसुनवाई में आवेदन प्रस्तुत कर आरोप लगाया था कि ग्राम रोजगार सहायक द्वारा पात्र हितग्राहियों के स्थान पर अपात्र व्यक्तियों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया। शिकायत में कई ऐसे लोगों के नाम शामिल किए गए हैं जिनके पास पहले से पक्के मकान होने का उल्लेख किया गया है।

सीईओ जिला पंचायत सतना द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया यह कृत्य वित्तीय अनियमितता, अनुशासनहीनता एवं पदीय दायित्वों की अवहेलना की श्रेणी में पाया गया है। इसी के तहत ग्राम रोजगार सहायक अनुज कुमार पयासी को ग्राम पंचायत नारायणपुर के कार्यों से विरत कर जनपद पंचायत सोहावल कार्यालय में संबद्ध किया गया है, जहां वे कम्प्यूटर संबंधी कार्य करेंगे आदेशानुसार जांच अवधि के दौरान उन्हें निर्धारित मासिक पारिश्रमिक का 50 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा।

साथ ही मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत सोहावल को मामले की विस्तृत विभागीय जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।विभागीय जांच अधिकारी एवं अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त करते हुए एक माह के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

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