मधेपुरा के किसान के बेटे अखिलेश कुमार ने 70वीं BPSC में लहराया परचम, RDO/DSP बनकर रचा इतिहास

By Gaurav Kabir

Published on: अभी-अभी

मधेपुरा जिले के साहूगढ़ दीवानी टोला निवासी अखिलेश कुमार ने 70वीं बीपीएससी (70th BPSC Result) में सफलता हासिल कर RDO और DSP के पद पर चयनित होकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। इससे पहले वे 68वीं BPSC में BPRO बने थे।

मधेपुरा न्यूज़: किसानी से लेकर अधिकारी बनने तक का सफर

मधेपुरा: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के परिणाम घोषित होते ही मधेपुरा जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है। जिले के साहूगढ़ दीवानी टोला के रहने वाले एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार के बेटे अखिलेश कुमार ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी संसाधनों की मोहताज नहीं होती। अखिलेश ने 70वीं BPSC परीक्षा में शानदार सफलता हासिल करते हुए ग्रामीण विकास पदाधिकारी (RDO) और डीएसपी (DSP) जैसे प्रतिष्ठित पदों के लिए चयनित होकर इतिहास रच दिया है।

निरंतर प्रयास से रचा दोहरा कीर्तिमान

​अखिलेश कुमार की यह सफलता अचानक नहीं मिली है। उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा इससे पहले भी मनवाया है।

  • 68वीं BPSC: अखिलेश का चयन पंचायती राज पदाधिकारी (BPRO) के पद पर हुआ था।
  • 70वीं BPSC: अब उन्होंने इस परीक्षा में सफलता के झंडे गाड़ते हुए RDO और DSP के पद पर चयनित होकर दोहरा कीर्तिमान स्थापित किया है।

पटना में रहकर की कड़ी मेहनत

​अखिलेश के पिता दीनदयाल यादव पेशे से एक किसान हैं और खेती-बाड़ी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। अखिलेश बचपन से ही मेधावी और अनुशासित रहे हैं। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पटना का रुख किया और वहीं रहकर BPSC की तैयारी शुरू की। उनकी यह शानदार सफलता उनके उसी अनुशासन और दिन-रात की मेहनत का नतीजा है।

गाँव और समाज की सेवा है मुख्य लक्ष्य

​अपनी सफलता पर विनम्रता जताते हुए अखिलेश कुमार ने बताया कि उनका मुख्य लक्ष्य हमेशा से अपने गाँव और समाज की सेवा करना रहा है। एक ग्रामीण विकास पदाधिकारी (RDO) के रूप में वे सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने और ग्रामीण इलाकों के विकास को गति देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

साहूगढ़ में जश्न का माहौल

​अखिलेश की सफलता की खबर जैसे ही उनके पैतृक गाँव साहूगढ़ दीवानी टोला पहुंची, पूरे इलाके में जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों, शिक्षकों और परिजनों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर बधाइयां दीं। आज अखिलेश मधेपुरा और पूरे बिहार के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा (Inspiration) बन चुके हैं।

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