साइबर तहसील 2.0 से नामांतरण प्रक्रिया हुई डिजिटल, पारदर्शी और सरल,जिले में साढ़े 9 हजार से अधिक ऑनलाइन नामांतरण प्रकरणों का हुआ त्वरित निराकरण,अब 70 दिन की प्रक्रिया मात्र 20 से 25 दिन में हो रही पूरी

By Gaurav Kabir

Published on: अभी-अभी

कटनी:-सुशासन, प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में कलेक्‍टर श्री आशीष तिवारी के नेतृत्व में राजस्‍व विभाग लगातार प्रभावी कदम उठा रहा है। नागरिकों को सरकारी सेवाएं सरल, सुगम और समयबद्ध

कटनी:-सुशासन, प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में कलेक्‍टर श्री आशीष तिवारी के नेतृत्व में राजस्‍व विभाग लगातार प्रभावी कदम उठा रहा है। नागरिकों को सरकारी सेवाएं सरल, सुगम और समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराने हेतु “साइबर तहसील 2.0” पहल राजस्व प्रणाली में ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण परिवर्तन का माध्यम बनी है। भूमि नामांतरण प्रक्रिया को डिजिटल और केंद्रीकृत बनाकर इस व्यवस्था ने नागरिक सुविधाओं को अधिक सहज और प्रभावी बनाया है।

डिजिटल व्यवस्था से त्वरित हुआ नामांतरण निराकरण:-

“साइबर तहसील 2.0” व्यवस्था से अब तक जिले में 9 हजार 654 ऑनलाइन नामांतरण प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया जा चुका है। जिसमें तहसील कटनी में अब तक 1063, कटनी नगर में 1116, ढ़ीमरखेड़ा में 957, बड़वारा में 1031, बरही में 850, बहोरीबंद में 1082, रीठी में 1284, विजयराघवगढ़ में 1253 और तहसील स्‍लीमनाबाद में 1018 प्रकरणों को निराकृत किया जा चुका है।पहले जहां नामांतरण की प्रक्रिया में लगभग 70 दिन का समय लगता था, वहीं अब अधिकांश प्रकरण मात्र 20 से 25 दिनों में पूरे हो रहे हैं। इससे नागरिकों के समय, श्रम और धन की बचत सुनिश्चित हुई है।

“साइबर तहसील 1.0” से “2.0” तक का सफल विस्तार:-

राज्य सरकार ने साइबर तहसील व्यवस्था की शुरुआत “साइबर तहसील 1.0” के रूप में की थी। इसके अंतर्गत प्रारंभिक चरण में पूर्ण खसरा से संबंधित नामांतरण प्रकरणों को शामिल किया गया था। रजिस्ट्री के बाद पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित होती थी और मैन्युअल हस्तक्षेप को न्यूनतम रखा गया था। इस व्यवस्था की सफलता को देखते हुए सरकार ने इसका दायरा बढ़ाते हुए “साइबर तहसील 2.0” लागू की। इसमें अब आंशिक खसरा, अर्थात भूमि के किसी हिस्से की बिक्री से संबंधित नामांतरण प्रकरणों को भी डिजिटल प्रणाली में शामिल किया गया है।

आंशिक खसरा प्रकरणों का समाधान हुआ सरल:-

आंशिक खसरा से जुड़े मामले तकनीकी रूप से अधिक जटिल माने जाते हैं, क्योंकि इनमें भूमि के हिस्से का सीमांकन, रिकॉर्ड संशोधन और संबंधित जानकारी का सटीक अद्यतन आवश्यक होता है। “साइबर तहसील 2.0” ने इस चुनौती का समाधान डिजिटल तकनीक से किया है। इससे राजस्व रिकॉर्ड को अद्यतन करने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनी है। साथ ही भूमि संबंधी विवादों की संभावनाओं में भी कमी आई है।

पारदर्शिता और जवाबदेही को मिला बल:-

“साइबर तहसील 2.0” केवल एक तकनीकी प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि पारदर्शी और जवाबदेह शासन की प्रभावी पहल बनकर उभरी है। ऑनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था और न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के कारण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है। इससे नागरिकों का शासन की व्यवस्था पर विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

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