किसानों को ज़रूरत के मुताबिक मिलेगी पर्याप्त खाद,कलेक्‍टर श्री तिवारी ने ई-टोकन द्वारा ही खाद का वितरण कराने के दिये निर्देश

By Gaurav Kabir

Published on: June 14, 2026

कटनी – जिले में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर श्री आशीष तिवारी द्वारा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से निरंतर संवाद और सार्थक प्रयासों की वजह से वर्तमान में जायद एवं खरीफ फसलों

कटनी – जिले में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर श्री आशीष तिवारी द्वारा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से निरंतर संवाद और सार्थक प्रयासों की वजह से वर्तमान में जायद एवं खरीफ फसलों के लिए सर्वाधिक मांग वाली उर्वरक एनपीके और नीम कोटेड यूरिया की दो रैक झुकेही रैक प्वाइंट पर आ गई है। इससे जिले को 920 मीट्रिक टन एनपीके और 740 मीट्रिक टन यूरिया मिलेगी।

उपसंचालक कृषि ने बताया कि रैक से आई एनपीके खाद में से कटनी डबल लॉक केन्द्र के लिए 150 मीट्रिक टन, बहोरीबंद डबल लॉक केन्द्र के लिए 100 मीट्रिक टन, स्‍लीमनाबाद डबल लॉक केन्‍द्र के लिए 90 मीट्रिक टन तथा मझगवां बड़वारा और बरही डबल लॉक केन्‍द्र के लिए 200-200 मीट्रिक टन एनपीके उर्वरक आवंटित की गई है। जबकि जिला सहकारी केन्‍द्रीय बैंक कटनी को 200 मीट्रिक टन उर्वरक आवंटित की गई है।

इसी प्रकार सीएमएस उमरियापान ढीमरखेड़ा, सीएमएस कटनी और सीएमएस बाकल को 30-30 मीट्रिक टन खाद आवंटित की गई है। इसके अलावा एमपी एग्रो कटनी को कुल 90 मीट्रिक टन खाद आवंटित की गई है। जिससे यहां के किसानों को पर्याप्त मात्रा में उनकी जरूरत के मुताबिक उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।

इसी क्रम में रैक से आई नीम कोटेड यूरिया में से कटनी डबल लॉक केन्द्र के लिए 60 मीट्रिक टन, बहोरीबंद तथा स्‍लीमनाबाद डबल लॉक केन्‍द्र के लिए 90-90 मीट्रिक टन और मझगवां बड़वारा डबल लॉक केन्‍द्र के लिये 120 मीट्रिक टन नीम कोटेड यूरिया उर्वरक आवंटित की गई है। जबकि जिला सहकारी केन्‍द्रीय बैंक कटनी को 200 मीट्रिक टन उर्वरक आवंटित की गई है।

इसी प्रकार सीएमएस कटनी, सीएमएस रीठी, सीएमएस बड़वारा और सीएमएस बाकल को 30-30 मीट्रिक टन यूरिया आवंटित की गई है। इसके अलावा एमपी एग्रो कटनी को कुल 60 मीट्रिक टन खाद आवंटित की गई है। जिससे यहां के किसानों को पर्याप्त मात्रा में उनकी जरूरत के मुताबिक उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।

कलेक्टर ने उपसंचालक कृषि को निर्देशित किया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि जिले में बिना ई-टोकन के खाद का वितरण न हो। किसान की जमीन (खसरा नंबर) और बोई गई फसल के आधार पर खाद की मात्रा सॉफ्टवेयर द्वारा तय की जाएगी। इससे जरूरत से ज्यादा भंडारण या कालाबाजारी पर पूरी तरह लगाम लगेगी। किसान अब घर बैठे पोर्टल पर देख सकेंगे कि किस केंद्र पर कितना स्टॉक उपलब्ध है। किसान भाई अपनी सुविधा अनुसार प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां (पैक्‍स), डबल लॉक केंद्र और निजी विक्रेताओ, सशुल्क एमपी ऑनलाइन और कॉमन सर्विस सेंटर केंद्रों पर जाकर ई-टोकन प्राप्त कर सकते हैं।

शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि कोई भी सहकारी समिति या निजी विक्रेता बिना ई-टोकन के खाद का विक्रय करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के तहत कठोर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

जिले के समस्त कृषकों से अपील की गई है कि वे अपनी मिट्टी के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए केवल संतुलित उर्वरकों का ही उपयोग करें। अनावश्यक खाद का प्रयोग न केवल लागत बढ़ाता है, बल्कि भूमि की उर्वरक शक्ति को भी नुकसान पहुँचाता है।

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