सिवनी:मध्यप्रदेश शासन किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग मंत्रालय भोपाल एवं कलेक्टर सिवनी के निर्देशानुसार तथा उपसंचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग सिवनी के मार्गदर्शन में डीएपी उर्वरक के अवैध भंडारण एवं प्राथमिक रूप से नकली होने की आशंका के मामले में कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विभाग को शिकायत मिली थी कि ग्राम बाम्हनवाड़ा स्थित एक मकान में डीएपी उर्वरक का अवैध भंडारण किया गया है। शिकायत के आधार पर सहायक संचालक श्री पवन कुमार कौरव, जिला परामर्शदाता श्री मुकेश मीणा एवं कृषि विस्तार अधिकारी श्री कुलदीप सिंह द्वारा ग्राम बाम्हनवाड़ा पहुंचकर जांच की गई।
जांच के दौरान शिवकुमार मसराम के मकान में चम्बल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड की मुद्रित बोरियों में भरे हुए 150 बैग डीएपी उर्वरक भंडारित पाए गए। मौके पर मौजूद शिवकुमार मसराम के पिता श्री अन्नीलाल मसराम से पूछताछ करने पर उन्होंने बताया कि उक्त उर्वरक ग्राम कहानी, विकासखंड घंसौर निवासी अशोक गोल्हानी द्वारा विक्रय हेतु भंडारित कराया गया है।
अधिकारियों द्वारा अशोक गोल्हानी को मौके पर बुलाकर डीएपी उर्वरक से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया, किन्तु उनके द्वारा भंडारित 150 बैग उर्वरक के संबंध में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। दस्तावेजों के अभाव में उक्त उर्वरक को अवैध भंडारित माना गया तथा प्राथमिक जांच में इसके नकली होने की आशंका व्यक्त की गई।
इसके पश्चात अधिकारियों द्वारा मौके पर पंचनामा तैयार कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की गई। मामले में ग्राम कहानी, विकासखंड घंसौर निवासी अशोक गोल्हानी के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 एवं उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के प्रावधानों के तहत घंसौर थाना में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्रीमती रश्मि राजनेगी द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई है।
कृषि विभाग ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे डीएपी उर्वरक के संबंध में किसी भी अवैधानिक तरीके से विक्रय करने वाले व्यक्तियों के बहकावे में न आएं तथा केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही उर्वरक क्रय करें। विभाग ने किसानों को डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके उर्वरकों एवं सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) के उपयोग की सलाह भी दी है।







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