बिहार सरकार राज्य के लाखों परिवारों को एक बड़ी राहत देने की तैयारी कर रही है। अक्सर बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) बनवाते समय अभिभावकों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन अब इस प्रक्रिया को बेहद सरल और सुविधाजनक बनाया जा रहा है।
अब जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रथम श्रेणी के दंडाधिकारी (First Class Magistrate) के शपथ पत्र की अनिवार्यता को खत्म कर, नोटरी पब्लिक (Notary Public) से जारी शपथ पत्र को भी वैध मानने का प्रस्ताव लाया गया है।
क्या है पूरा प्रस्ताव?
वर्तमान नियम के अनुसार, यदि जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में देरी होती है, तो अभिभावकों को प्रथम श्रेणी के दंडाधिकारी से शपथ पत्र (Affidavit) बनवाना अनिवार्य होता है। यह प्रक्रिया काफी लंबी और थकाऊ होती है।
इस परेशानी को दूर करने के लिए विधि विभाग (Law Department) ने योजना एवं विकास विभाग (Planning and Development Department) को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में स्पष्ट रूप से प्रस्ताव दिया गया है कि दंडाधिकारी के साथ-साथ अब नोटरी पब्लिक द्वारा जारी शपथ पत्र को भी मान्यता दी जाए।

आम लोगों को मिलने वाले मुख्य फायदे
इस नई पहल के लागू होने से बिहार की जनता को कई सीधे लाभ मिलेंगे:
- समय और धन की बचत: अब अभिभावकों को दंडाधिकारी कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, जिससे उनके कीमती समय और पैसों की बचत होगी।
- प्रक्रिया में सरलता: नोटरी पब्लिक से शपथ पत्र बनवाना दंडाधिकारी की तुलना में कहीं अधिक आसान और सुलभ है।
- भागदौड़ से निजात: लालफीताशाही और कोर्ट-कचहरी की अतिरिक्त परेशानी से माता-पिता को छुटकारा मिलेगा।
- तेज निपटारा: प्रक्रिया आसान होने से बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र अब कम समय में और बिना किसी अड़चन के बन सकेंगे।
लाखों परिवारों को मिलेगी राहत
बच्चों के स्कूल में दाखिले से लेकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने तक, हर जगह जन्म प्रमाण पत्र एक बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज है। बिहार सरकार की इस प्रस्तावित पहल के लागू होते ही राज्य के लाखों अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी और सरकारी कार्यप्रणाली में आम जनमानस का विश्वास और भी मजबूत होगा।







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