भागलपुर, 17 जुलाई 2026:- भागलपुर के समीक्षा भवन में जिला पदाधिकारी अलंकृता पाण्डेय के अध्यक्षता में जिले को वर्ष 2026 तक टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर जिला स्वास्थ्य समिति के साथ बैठक आयोजित की गई।
बैठक में टीबी मरीजों को निक्षय मित्र के माध्यम से नियमित रूप से पोषण किट (फूड बास्केट) उपलब्ध कराने तथा अभियान में अधिक से अधिक सामाजिक, औद्योगिक एवं संस्थागत भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने ने कहा कि सरकार द्वारा टीबी मरीजों को निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन शीघ्र स्वस्थ होने के लिए पौष्टिक आहार भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से निक्षय मित्र पहल शुरू की गई है, जिसके तहत समाज के सक्षम नागरिक, स्वयंसेवी संस्थाएं, कॉर्पोरेट संस्थान एवं अन्य संगठन टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें छह माह तक पोषण सहायता प्रदान कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि इच्छुक व्यक्ति अथवा संस्थाएं communitysupport.nikshay.in पोर्टल पर पंजीकरण कर निक्षय मित्र बन सकते हैं। पोषण किट वितरण के उपरांत निक्षय मित्रों एवं दानकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया जाता है। एक पोषण किट की अनुमानित लागत 700 से 800 रुपये होती है, जिसमें दाल, मूंगफली, सोयाबीन, सत्तू, गुड़ सहित अन्य पौष्टिक खाद्य सामग्री शामिल रहती है।
बैठक में बताया गया कि वर्तमान में भागलपुर जिले में 3,092 टीबी मरीज उपचाररत हैं। इन मरीजों के उपचार एवं पोषण सहायता की सतत निगरानी की जा रही है। संभावित टीबी मरीजों की पहचान के लिए जिले के जिला अस्पताल, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तथा आरबीएसके (RBSK) की टीमें सक्रिय हैं। लक्षण आधारित स्क्रीनिंग के साथ-साथ सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में एक्स-रे एवं ट्रूनैट (TrueNat) जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने ने सभी संस्थानों, उद्योगों, स्वयंसेवी संगठनों एवं समाज के सक्षम लोगों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को पोषण सहायता उपलब्ध कराएं और टीबी मुक्त भारत अभियान-2026 को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दें।
एनटीपीसी, कहलगांव की सराहना करते हुए बताया गया कि संस्था वर्तमान में 500 टीबी मरीजों को निक्षय मित्र के रूप में पोषण किट उपलब्ध करा रही है।
बैठक में भारतीय चिकित्सा संघ (IMA), लायंस क्लब ऑफ इंडिया, अडानी पावर तथा विभिन्न बैंकों—एसबीआई, पीएनबी, यूको बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक एवं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया—के प्रतिनिधियों सहित कई सामाजिक संगठनों के सदस्यों उपस्थित थे।







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