औरंगाबाद (बिहार)। कृषि क्षेत्र को आधुनिक, टिकाऊ और किसानों के लिए अधिक मुनाफेदार बनाने की दिशा में औरंगाबाद जिले ने एक बड़ा कदम उठाया है। अनुग्रह नारायण नगर भवन में जिला स्तरीय शारदी (खरीफ) महाभियान-2026 के अंतर्गत एक भव्य कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन औरंगाबाद की जिला पदाधिकारी (DM) श्रीमती अभिलाषा शर्मा द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
इस अवसर पर कृषि विभाग, उद्यान विभाग, आत्मा, कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों समेत बड़ी संख्या में वैज्ञानिक और प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।
🌽 खरीफ मौसम 2026: पारंपरिक धान के साथ इन फसलों पर फोकस
जिला कृषि पदाधिकारी ने कार्यशाला में बताया कि इस बार खरीफ महाभियान का मुख्य उद्देश्य उत्पादन में वृद्धि करना और किसानों को पारंपरिक खेती के चक्र से बाहर निकालकर आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। इसके लिए जिले में विशेष लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं:
- स्वीट कॉर्न की खेती: 50 एकड़ का लक्ष्य
- बेबी कॉर्न की खेती: 85 एकड़ का लक्ष्य
- संकर धान (Hybrid Paddy): 225 एकड़ में खेती और 387 क्विंटल बीज का वितरण।
- संकर मक्का: 25 एकड़ में खेती और 14 क्विंटल बीज का वितरण।
🌾 न्यूट्री सीरियल (मिलेट्स) और पोषण आधारित कृषि को बढ़ावा
कृषोन्नति योजना (खाद्य एवं पोषण सुरक्षा) के तहत जिले में मोटे अनाजों (Millets) के विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके तहत निम्नलिखित लक्ष्य तय किए गए हैं:
- रागी (मड़ुआ): 1000 एकड़
- रामदाना: 250 एकड़
- सावां: 100 एकड़ इसके साथ ही किसानों को ज्वार, बाजरा और मड़ुआ के हाइब्रिड बीज भारी अनुदान (subsidy) पर उपलब्ध कराए जाएंगे।
🌿 150 एकड़ में होगी ‘सुगंधित धान’ की प्राकृतिक खेती
राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत औरंगाबाद के 3 क्लस्टरों को चुना गया है, जहाँ 375 किसानों के माध्यम से 150 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक तरीके से सुगंधित धान का उत्पादन कराया जाएगा। इससे खेती की लागत कम होगी, मिट्टी की सेहत सुधरेगी और पर्यावरण का भी संरक्षण होगा।
📘 “मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन” पुस्तक का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान डीएम अभिलाषा शर्मा द्वारा “मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन” नामक एक विशेष गाइड बुक का विमोचन किया गया। इस पुस्तक में जिले की ब्लॉकवार मिट्टी की स्थिति, सॉयल हेल्थ कार्ड के आधार पर खादों का सही इस्तेमाल और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी गई है।
डीएम अभिलाषा शर्मा का संदेश:
“किसान सिर्फ पारंपरिक धान की खेती तक सीमित न रहें। स्वीट कॉर्न, बेबी कॉर्न और मिलेट्स जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाएं। बिना मिट्टी जांच के अंधाधुंध रासायनिक खादों का उपयोग करने से लागत बढ़ती है। सभी किसान कम से कम अपने 25 प्रतिशत हिस्से में प्राकृतिक या जैविक खेती की शुरुआत जरूर करें।”
कार्यशाला के अंत में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को धान की सीधी बुआई (DSR), मिलेट्स और अरहर उत्पादन के साथ-साथ जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों का लाइव प्रशिक्षण भी दिया गया।






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