पटना: बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। पीएमसीएच के नेफ्रोलॉजी विभाग की टीम ने पहली बार ‘प्लाज्मा एक्सचेंज’ (Plasma Exchange) तकनीक का सफल प्रयोग कर एक मरीज को मौत के मुंह से बाहर निकाला है।
अस्पताल के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि यह सुविधा आमतौर पर केवल बड़े कॉर्पोरेट और निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध होती है।
तीन दिन तक चला जटिल उपचार
मरीज एक दुर्लभ ऑटोइम्यून बीमारी (Rare Autoimmune Disease) से ग्रसित था, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ही शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाने लगती है। इस जानलेवा स्थिति से निपटने के लिए नेफ्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला।
यह जटिल उपचार लगातार तीन दिनों तक चला। डॉक्टरों की दिन-रात की मेहनत और प्लाज्मा एक्सचेंज तकनीक के सफल प्रयोग के बाद मरीज की जान बचाई जा सकी।
मरीज की हालत में उल्लेखनीय सुधार
नेफ्रोलॉजी विभाग की इस ऐतिहासिक सफलता के बाद मरीज की स्थिति में अब उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है। मरीज के शरीर ने इस जटिल प्रक्रिया को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है और वह अब तेजी से रिकवर कर रहा है।
लाखों का इलाज हुआ बिल्कुल मुफ्त
इस केस की सबसे खास बात यह रही कि जिस इलाज के लिए निजी अस्पतालों में मरीजों को लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, वह पीएमसीएच में बिल्कुल निःशुल्क (Free of Cost) किया गया। इस सुविधा के शुरू होने से बिहार के गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए एक नई उम्मीद की किरण जगी है।
इस खबर के मुख्य बिंदु:
- क्या है उपलब्धि: पीएमसीएच में पहली बार प्लाज्मा एक्सचेंज तकनीक का सफल प्रयोग।
- बीमारी: दुर्लभ ऑटोइम्यून बीमारी का इलाज।
- टीम: नेफ्रोलॉजी विभाग की टीम को मिली बड़ी सफलता।
- खर्च: निजी अस्पतालों में लाखों का खर्च, पीएमसीएच में मुफ्त सुविधा।
पीएमसीएच की यह सफलता न केवल अस्पताल के डॉक्टरों की काबीलियत को दर्शाती है, बल्कि राज्य की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में बढ़ते भरोसे का भी प्रतीक है।






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