पटना जिला को मूक-बधिर मुक्त करना हैः जिलाधिकारी,एक साल से कम समय में 78 बच्चों को श्रवण श्रुति कार्यक्रम के तहत उपचार की सुविधा उपलब्ध करायी गई

By Gaurav Kabir

Published on: 32 मिनट पहले

पटना जिला को मूक-बधिर मुक्त करना हैः जिलाधिकारी,एक साल से कम समय में 78 बच्चों को श्रवण श्रुति कार्यक्रम के तहत उपचार की सुविधा उपलब्ध करायी गई 27 मई श्रवण श्रुति कार्यक्रम अंतर्गत 0-6 वर्ष

पटना जिला को मूक-बधिर मुक्त करना हैः जिलाधिकारी,एक साल से कम समय में 78 बच्चों को श्रवण श्रुति कार्यक्रम के तहत उपचार की सुविधा उपलब्ध करायी गई

27 मई श्रवण श्रुति कार्यक्रम अंतर्गत 0-6 वर्ष तक के बच्चों के प्रारंभिक श्रवण जाँचोपरांत OAE Positive चिन्हित कुल 25 बच्चों में कोक्लियर इम्पलांट हेतु दिनांक 27.05.2026 को स्व० एस० एन० मेहरोत्रा मेमोरियल ई०एन०टी० फाउन्डेशन, कानपुर जाने वाले पटना जिला के विभिन्न प्रखंडों के बच्चों एवं उनके अभिभावकों से जिला पदाधिकारी, पटना ने पटना समाहरणालय में आज एक-एक कर मुलाकात की। अभिभावकों के चेहरे पर काफी खुशी झलक रही थी। सभी अभिभावकों द्वारा अपने बच्चों के जीवन को एक नई दिशा मिलने की दिशा में जिलाधिकारी के अमूल्य पहल पर अत्यंत हर्ष प्रकट किया गया। जन्मजात एवं प्रारंभिक (0-3 वर्ष) तक बच्चों में श्रवण बाधिता की पहचान, स्क्रीनिंग, परीक्षण एवं उपचार सुनिश्चित करने हेतु जिला पदाधिकारी द्वारा अधिकारियों को निदेशित किया गया।विदित हो कि पटना जिला में करीब 4,25,911 (चार लाख पच्चीस हजार नौ सौ ग्यारह) बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है।

जिलाधिकारी ने कहा कि 1,747 बच्चों को सुनने की समस्या से ग्रस्त बच्चों के तौर पर चिन्हित किया गया था जिसमें 1,658 बच्चों की समस्या को कंजर्वेटिव ट्रीटमेंट/लघु सर्जरी के द्वारा दूर किया गया। पटना जिला में ओएई प्रतिवेदन के आधार पर कोक्लियर इम्प्लांट हेतु शेष 89 बच्चों को चिन्हित किया गया है। इसमें से 53 बच्चों को निःशुल्क कोक्लियर इम्प्लांट उपचार की सुविधा पूर्व में ही उपलब्ध करायी गयी है। आज पटना समाहरणालय में कोक्लियर इम्प्लांट उपचार की सुविधा प्राप्त 4-5 साल के कई बच्चों ने जिलाधिकारी के समक्ष ए, बी, सी, डी, ……., 1, 2, 3, …………. आदि बोलकर सुनाया। कार्यक्रम में सभी अभिभावकों के चेहरे पर प्रसन्नता झलक रही थी।

जिलाधिकारी भी इन बच्चों में सुधार को देखकर अत्यंत खुश हुए। अभिभावकों ने जिला प्रशासन के मानवीय प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया। जिलाधिकारी ने कहा कि इन सभी 53 बच्चों के कोक्लियर इम्प्लांट के बाद इनको स्पीच थेरैपी कराया जा रहा है। आज पुनः 25 बच्चों को कोक्लियर इम्प्लांट के लिए कानपुर भेजा जा रहा है। इस प्रकार पटना जिला में एक साल से भी कम समय में 78 बच्चों को श्रवण श्रुति कार्यक्रम के तहत उपचार की सुविधा उपलब्ध करायी गई।

जिलाधिकारी ने कहा कि गयाजी जिला में तीन साल में 70 बच्चों को यह सुविधा उपलब्ध करायी गई थी। जिलाधिकारी ने कहा कि इस प्रकार पटना जिला में काफी अच्छी प्रगति है।

उन्होंने इस पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पटना जिला को मूक-बधिर मुक्त करना है। इसके लिए स्वास्थ्य, आईसीडीएस, जीविका, पंचायती राज, समाज कल्याण, शिक्षा, ग्रामीण विकास, कल्याण, सिविल सोसायटी, माता-पिता, अभिभावकगण सहित सभी स्टेकहोल्डर्स को सजग, तत्पर एवं प्रतिबद्ध रहना होगा।जिलाधिकारी ने कहा कि कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी हेतु विभिन्न बैच में बच्चों को कानपुर भेजा जा रहा है। सभी का सफलतापूर्वक सर्जरी हो रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों में श्रवण बाधिता की पहचान, परीक्षण एवं उपचार तथा उपचारित बच्चों का स्पीच थेरेपी करते हुए सामाजिक समन्वय हार्दिक प्रसन्नता का विषय है। अधिकारियों को इन बच्चों की हरसंभव सहायता हेतु विशेष प्रयास करने का निदेश दिया गया है। आज के कार्यक्रम में श्रवण श्रुति कार्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 5 अधिकारियों, चिकित्सकों एवं कर्मियों को जिलाधिकारी द्वारा सम्मानित किया गया। मसौढ़ी प्रखंड के सीडीपीओ एवं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के चिकित्सक; पालीगंज के सीडीपीओ; राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल ऑफिसर तथा एक डाटा इन्ट्री ऑपरेटर सम्मानित होने वालों में शामिल हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार हमारे देश में प्रति 1,000 बच्चों में 5 से 8 बच्चे बधिर जन्म लेते हैं।

राज्य सरकार दिव्यांगजन के अधिकारों, गरिमापूर्ण जीवन एवं समान अवसर के लिए प्रतिबद्ध है। श्रवण श्रुति कार्यक्रम ने न केवल बच्चों के कानों को ठीक किया, बल्कि उन आवाजों को सुना, जो पहले कभी सुनी ही नहीं गई थी। यह एक समावेशी एवं संवेदनशील स्वास्थ्य प्रणाली का द्योतक है। जिलाधिकारी ने कहा कि मूक-बधिर बच्चों में सुनने-बोलने की क्षमता आए इसके लिए कम उम्र में ही ऐसे बच्चों की पहचान जरूरी है। जागरूकता की कमी के कारण कुछ ही बच्चों का समुचित स्क्रीनिंग हो पाती है। हमें इसमें सुधार लाने की आवश्यकता है। आइए हमसब मिलकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा पीछे न छूटे। जिलाधिकारी ने कहा कि 5 साल से कम उम्र के शत-प्रतिशत मूक-बधिर बच्चों का लक्षण के अनुसार समुचित उपचार, सर्जरी एवं थेरैपी के माध्यम से सुनने, बोलने की शक्ति लौटाना है। इसके लिए सभी पदाधिकारी सघन प्रयास करें।

जिलाधिकारी ने कहा कि उपचार एवं सर्जरी के साथ-साथ नियमित स्पीच थेरैपी तथा माता-पिता एवं अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी काफी आवश्यक है। जल्दी जाँच, सही इलाज एवं थेरैपी से बच्चा सामान्य बच्चों की तरह बोल सकता है। देरी से नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह जीवन-परिवर्तनकारी पहल 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों में होने वाली श्रवण हानि (hearing loss) की समय पर पहचान, उपचार और पुनर्वास पर केंद्रित है। इसे पूरे पटना जिला में लागू किया गया है। इस योजना से मूक बधिर बच्चों को समुचित सहायता उपलब्ध हो रही है। नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग और संस्थागत क्षमता को भी मज़बूती मिली है।ज़िलाधिकारी ने कहा यह योजना उन बच्चों के लिए है जो जन्म से या बचपन में सुन नहीं सकते हैं।

इसका उद्देश्य बहुत स्पष्ट हैः जल्दी पहचान, सटीक इलाज, और समावेशी पुनर्वास। श्रवण श्रुति कार्यक्रम ने न सिर्फ बच्चों के कानों को सुनने की शक्ति दी, बल्कि उनके जीवन में नई आशा, नई ऊर्जा, और सबसे महत्वपूर्ण-एक आवाज़ लौटाई।

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