Patna News: जिलाधिकारी का बड़ा एक्शन, फर्जी लगान रसीद और अवैध जमाबंदी मामले में राजस्व कर्मचारी सेवा से बर्खास्त

By Gaurav Kabir

Published on: June 8, 2026

​पटना में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: राजस्व कर्मचारी मधेश राम बर्खास्त ​पटना: बिहार में नीतीश सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत पटना जिला प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी

  • दोषी कर्मचारी: श्री मधेश राम, राजस्व कर्मचारी (वर्तमान पदस्थापना: अंचल कार्यालय, पुनपुन)।
  • आरोप: फर्जी लगान रसीद काटना, अवैध जमाबंदी कायम करना और गलत तरीके से LPC की अनुशंसा करना।
  • कार्रवाई: बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त।
  • डीएम का कड़ा संदेश: भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति, जनहित के कार्यों में पारदर्शिता जरूरी।

पटना में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: राजस्व कर्मचारी मधेश राम बर्खास्त

पटना:

बिहार में नीतीश सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत पटना जिला प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी (DM), पटना ने कार्यों में घोर लापरवाही, पद के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोपों में राजस्व कर्मचारी श्री मधेश राम को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है।

​बर्खास्त कर्मचारी वर्तमान में अंचल कार्यालय, पुनपुन में पदस्थापित थे। उन पर मसौढ़ी अंचल में तैनाती के दौरान जाली दस्तावेजों के आधार पर भू-धारियों को अवैध लाभ पहुंचाने का दोष सिद्ध हुआ है।

क्या है पूरा मामला? (जांच में प्रमाणित हुए आरोप)

​जांच रिपोर्ट के अनुसार, श्री मधेश राम ने अंचल कार्यालय, मसौढ़ी में अपनी पदस्थापना के दौरान नियमों को ताक पर रखकर गंभीर जालसाजी की थी:

  • फर्जी लगान रसीद और जमाबंदी: आरोपी कर्मचारी ने बिना किसी सक्षम प्राधिकार (कॉम्पिटेंट अथॉरिटी) के आदेश के, विभिन्न रैयतों के नाम से अवैध रूप से फर्जी लगान रसीदें जारी कीं और अवैध जमाबंदी कायम की।
  • बैक-डेट में रसीद काटना: राजस्व कर्मचारी ने वर्ष 2019-20 में फर्जी तरीके से लगान रसीदें तैयार कर आवेदकों के नाम जारी कर दीं, जबकि उस समय वह जमाबंदी अस्तित्व में ही नहीं थी। वह जमाबंदी बाद में विभिन्न दाखिल-खारिज वादों के जरिए वर्ष 2021-22 में कायम हुई थी।
  • गलत LPC की अनुशंसा: फर्जी रसीद के आधार पर भू-स्वामित्व प्रमाण-पत्र (LPC) निर्गत करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को अनुशंसा भी भेजी गई, जिसमें कर्मचारी की सीधी मिलीभगत प्रमाणित हुई है।
  • जांच टीम का गठन: अपर समाहर्ता (Additional Collector), पटना को संचालन पदाधिकारी तथा अंचल अधिकारी (CO), मसौढ़ी को प्रस्तोता पदाधिकारी नियुक्त किया गया था।
  • सुनवाई का पूरा मौका: आरोपी कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया, लेकिन उनके द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण पूरी तरह से बनावटी और मनगढ़ंत पाया गया।
  • कड़ी सजा: आरोपों के पूरी तरह प्रमाणित होने के बाद, जिलाधिकारी ने माना कि ऐसे कर्मचारी का सेवा में बने रहना लोकहित के खिलाफ है। नतीजतन, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।

अधिकारियों को सख्त निर्देश: पारदर्शिता से हो काम

​इस बड़ी कार्रवाई के बाद जिलाधिकारी ने जिले के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि दायित्वों के निर्वहन में किसी भी प्रकार की शिथिलता, लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पटना जिला प्रशासन सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का अक्षरशः पालन कर रहा है। सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे जनहित के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और पूरी पारदर्शिता व उत्तरदायित्व के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

💬 Comments
?

No comments yet. Be the first to comment!

खबरें और भी arrow-right Created with Sketch Beta.