बिहार की सांस्कृतिक विरासत को बड़ा सम्मान: 3 पारंपरिक उत्पादों को मिला GI टैग

By Gaurav Kabir

Published on: June 14, 2026

​बिहार की समृद्ध कला, शिल्प और संस्कृति ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है। राज्य के तीन प्रमुख पारंपरिक उत्पादों—नालंदा की बावन बूटी साड़ी, गया के पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट और भोजपुर

​बिहार की समृद्ध कला, शिल्प और संस्कृति ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है। राज्य के तीन प्रमुख पारंपरिक उत्पादों—नालंदा की बावन बूटी साड़ी, गया के पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट और भोजपुर की पिढ़िया पेंटिंग को ‘भौगोलिक संकेतक’ (Geographical Indication – GI) टैग से सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि न केवल इन कलाओं को विश्व स्तर पर एक नई पहचान दिलाएगी, बल्कि स्थानीय कारीगरों के लिए रोजगार और आर्थिक विकास के नए द्वार भी खोलेगी।

GI टैग पाने वाले बिहार के तीन अनमोल रत्न

​इन तीनों उत्पादों का अपना एक अलग और समृद्ध इतिहास है, जो बिहार की माटी की खुशबू और कारीगरों की मेहनत को दर्शाता है:

1. बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक (नालंदा)

​बौद्ध धर्म के प्रतीकों और प्राचीन कलाकृतियों से प्रेरित, नालंदा की ‘बावन बूटी’ (Bawan Buti) साड़ियां सूती और तसर सिल्क पर बुनी जाती हैं। ‘बावन बूटी’ का अर्थ है 52 (बावन) छोटे-छोटे मोटिफ या बूटियां, जो पूरी साड़ी पर हाथ से उकेरी जाती हैं। GI टैग मिलने से अब बुनकरों को उनके इस बारीक काम की सही कीमत और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल सकेगा।

2. पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट (गया)

​गया जिले के पत्थरकट्टी गांव की यह कला सदियों पुरानी है। यहां के कारीगर काले पत्थर (Black Stone) को तराश कर भगवान बुद्ध की मूर्तियां, घरेलू उपयोग के सामान और सजावटी वस्तुएं बनाते हैं। इस हस्तशिल्प को GI टैग मिलने से इस क्षेत्र के पारंपरिक मूर्तिकारों की आजीविका को नई ऊर्जा मिलेगी और इस प्राचीन कला का संरक्षण हो सकेगा।

3. पिढ़िया पेंटिंग (भोजपुर)

​भोजपुर क्षेत्र की पिढ़िया (Pidhiya) पेंटिंग बिहार की लोक कला का एक अद्भुत उदाहरण है। यह चित्रकला विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं द्वारा त्योहारों और शुभ अवसरों पर बनाई जाती है। इसमें प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर धार्मिक और सांस्कृतिक कथाओं को चित्रित किया जाता है। पिढ़िया कला को GI मान्यता मिलना महिला सशक्तिकरण और लोक कलाओं के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

GI टैग मिलने के प्रमुख फायदे

  • कानूनी संरक्षण: अब कोई भी अन्य राज्य या व्यक्ति इन उत्पादों की नकल कर इन्हें अपने नाम से नहीं बेच सकेगा।
  • वैश्विक पहचान: इन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार (Export Market) में आसानी से जगह मिलेगी।
  • आर्थिक विकास: स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और मूर्तिकारों की आय में वृद्धि होगी।
  • पर्यटन को बढ़ावा: इन विशिष्ट कलाओं को देखने और खरीदने के लिए राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का रुझान बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दो बधाई

https://x.com/i/status/2066059799675183396

https://x.com/i/status/2066064474407346414

💬 Comments
?

No comments yet. Be the first to comment!

खबरें और भी arrow-right Created with Sketch Beta.