मधेपुरा: बिहार के मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज अनुमंडल स्थित फुलौत के विश्वप्रसिद्ध रसगुल्ले को अब राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की कवायद शुरू हो गई है। जिले के प्रसिद्ध ‘फुलौत के रसगुल्ले’ को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग (GI Tag) दिलाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता बसंत कुमार झा ने मधेपुरा के जिलाधिकारी (DM) को एक ज्ञापन सौंपा है।
100 साल से अधिक पुरानी है परंपरा
डीएम को लिखे पत्र में सामाजिक कार्यकर्ता बसंत कुमार झा ने बताया है कि उदाकिशुनगंज अनुमंडल के चौसा प्रखंड में अवस्थित फुलौत पंचायत एक प्रसिद्ध व्यावसायिक केंद्र है। यहां के कारीगरों द्वारा पिछले 100 से अधिक सालों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी एक विशिष्ट और पारंपरिक विधि से रसगुल्ले का निर्माण किया जा रहा है। शुद्ध दूध, दही और घी से बनने वाले इस खास रसगुल्ले का स्वाद इसे अन्य जगहों की मिठाइयों से बिल्कुल अलग बनाता है।
नेपाल तक है फुलौत के रसगुल्ले की डिमांड
फुलौत का यह रसगुल्ला केवल मधेपुरा जिले तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अपने विशिष्ट स्वाद और शुद्धता के कारण यह पूरे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और देश की सीमा पार नेपाल तक में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। शादी-विवाह हो या कोई भी शुभ अवसर, फुलौत के रसगुल्ले की मांग हमेशा बनी रहती है।
जीआई टैग (GI Tag) की मांग क्यों?
पत्र के माध्यम से जिलाधिकारी से यह आग्रह किया गया है कि मधेपुरा जिले की इस अनूठी और स्वादिष्ट पहचान को व्यावसायिक रूप से राष्ट्रीय मान्यता प्रदान करने के लिए ‘जीआई टैग’ दिलाने की दिशा में विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
जीआई टैग मिलने से फायदे:
- कारीगरों को लाभ: सदियों से इस रसगुल्ले को बनाने वाले स्थानीय कारीगरों को एक बड़ा बाजार और बेहतर मूल्य मिलेगा।
- राष्ट्रीय पहचान: मधेपुरा का नाम राष्ट्रीय पटल पर मिठाई के क्षेत्र में मजबूती से उभरेगा।
- नकली उत्पादों पर रोक: ‘फुलौत के रसगुल्ले’ के नाम पर अन्य जगहों पर बिकने वाली नकली मिठाइयों पर रोक लगेगी।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जिला प्रशासन इस दिशा में क्या कदम उठाता है और मधेपुरावासियों की यह पुरानी मांग कब तक पूरी होती है।






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