​10 जून नेत्रदान दिवस: जानिए कौन कर सकता है नेत्रदान? डॉ. संतोष कुमार से समझें पूरी प्रक्रिया और भ्रांतियां

By Gaurav Kabir

Published on: June 10, 2026

​मधेपुरा (ब्यूरो): हर साल 10 जून को लोगों में आंखों के दान के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से ‘नेत्रदान दिवस’ (Eye Donation Day) मनाया जाता है। आज भी हमारे देश में ऐसे कई लोग

मधेपुरा (ब्यूरो): हर साल 10 जून को लोगों में आंखों के दान के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से ‘नेत्रदान दिवस’ (Eye Donation Day) मनाया जाता है। आज भी हमारे देश में ऐसे कई लोग हैं, जो या तो किसी दुर्घटना का शिकार होकर या फिर जन्मजात अंधेपन का दंश झेल रहे हैं। थोड़ी सी जागरूकता और हमारे एक कदम से इन लोगों की जिंदगी में फिर से रोशनी लौट सकती है।

​नेत्रदान के इसी महत्व को समझाते हुए आदर्श आई केयर, उदाकिशुनगंज के निदेशक डॉ. संतोष कुमार ने आंखों की बीमारियों, नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों और इसके नियमों को लेकर विस्तार से जानकारी दी है।

​अंधेपन और आंखों से जुड़ी समस्याओं के मुख्य कारण

​आजकल की बदलती लाइफस्टाइल, अनियमित दिनचर्या, बढ़ता प्रदूषण और अत्यधिक स्ट्रेस के कारण लोग कम उम्र में ही आंखों की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।

​डॉ. संतोष कुमार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि कॉर्निया की बीमारियां (आंखों की अगली परत का क्षतिग्रस्त होना), मोतियाबिंद और ग्लूकोमा के बाद दृष्टि हानि (अंधेपन) का एक प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा, ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के कारण भी कई लोग अपनी आंखों की रोशनी खो देते हैं।

​नेत्रदान को लेकर समाज में फैली भ्रांतियां

​गांवों से लेकर शिक्षित समाज तक, आज भी नेत्रदान को लेकर कई अंधविश्वास फैले हुए हैं:

  • भ्रांति: आंखें दान करने से अगले जन्म में व्यक्ति अंधा पैदा होता है।
  • भ्रांति: नेत्रदान से मृतक का शरीर या चेहरा खराब हो जाता है।

सच्चाई: डॉ. संतोष कुमार स्पष्ट करते हैं कि इन बातों में कोई सच्चाई नहीं है। मृत्यु के बाद नेत्र बैंक के विशेषज्ञ मृतक के चेहरे को बिना कोई नुकसान पहुंचाए, बहुत ही आसानी से आंखों से केवल कॉर्निया (Cornea) निकालते हैं।

​नेत्रदान कौन कर सकता है? (Who can donate eyes?)

​समाज में यह सवाल अक्सर पूछा जाता है कि क्या चश्मा पहनने वाले या बीमार लोग नेत्रदान कर सकते हैं? इसका जवाब है – हाँ। निम्नलिखित स्थिति वाले लोग भी नेत्रदान कर सकते हैं:

  • ​चश्मा पहनने वाले लोग।
  • ​मोतियाबिंद या कालापानी (ग्लूकोमा) का ऑपरेशन करवा चुके लोग।
  • ​मधुमेह (Diabetes) और उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) के मरीज।
  • ​अस्थमा (दमा) या सांस फूलने की समस्या वाले लोग।
  • ​हृदय रोग और क्षय रोग (टीबी) के मरीज।

​नेत्रदान कौन नहीं कर सकता है? (Who cannot donate eyes?)

​डॉक्टर के अनुसार, कुछ गंभीर और संक्रामक रोगों से पीड़ित व्यक्ति नेत्रदान नहीं कर सकते हैं, जैसे:

  • ​एड्स (AIDS) या हैपेटाइटिस के मरीज।
  • ​पीलिया (Jaundice) या ब्लड कैंसर (Blood Cancer) से पीड़ित।
  • ​रेबीज (कुत्ते के काटने से होने वाली बीमारी)।
  • ​सेप्टीसिमिया, गैंगरीन या ब्रेन ट्यूमर के मरीज।
  • ​जिनकी आंख के आगे की काली पुतली (कॉर्निया) खराब हो चुकी हो।
  • ​जहर खाने या किसी अन्य गंभीर संक्रामक रोग से मृत्यु होने पर नेत्रदान की मनाही होती है।

​नेत्रदान की प्रक्रिया में कितना वक्त लगता है?

​नेत्रदान की प्रक्रिया बेहद सरल और सुरक्षित है। मृत्यु के बाद कॉर्निया निकालने के इस पूरे प्रोसेस में मात्र 15 से 20 मिनट का समय लगता है।

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