जिलाधिकारी श्रीमती वर्षा सिंह को मिली गुप्त सूचना के आधार पर श्रम विभाग के धावा दल ने बिदुपुर प्रखंड के राधा रमण चौक स्थित एक किराना स्टोर पर छापेमारी कर एक बाल श्रमिक को सुरक्षित विमुक्त कराया।
मुख्य बिंदु:
- त्वरित कार्रवाई: जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित जिला स्तरीय धावा दल ने मेसर्स भूषण किराना स्टोर में औचक छापेमारी की और वहां काम कर रहे बच्चे को मुक्त कराया।
- कानून का शिकंजा: नियमों का उल्लंघन करने और न्यूनतम मजदूरी न देने के मामले में संबंधित नियोजक के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
- भारी जुर्माना और सजा: बाल श्रम कराने वाले नियोजकों को 20,000 से 50,000 रुपये तक का जुर्माना, छह महीने की जेल या दोनों हो सकते हैं। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 20,000 रुपये बाल श्रमिक पुनर्वास कोष में अलग से जमा कराने होंगे।
- पुनर्वास और आर्थिक मदद: विमुक्त कराए गए बच्चे को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। उसे तत्काल सहायता के रूप में 3,000 रुपये बैंक खाते में दिए जाएंगे और मुख्यमंत्री राहत कोष से 25,000 रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) कराई जाएगी। साथ ही परिवार को अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा।
- टीम में शामिल अधिकारी: इस विशेष अभियान में श्रम अधीक्षक श्री शशि कुमार सक्सेना के निर्देश पर कई प्रखंडों के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी और बरांटी थाना की पुलिस टीम शामिल थी।
जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल श्रम की जानकारी मिले, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।






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