पूर्णिया, 04 जून 2026:
बिहार में नशामुक्त अभियान के तहत पूर्णिया पुलिस को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने सदर थाना क्षेत्र के शीशाबाड़ी एसएसबी (SSB) कैंप के पास से भारी मात्रा में स्मैक बरामद की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस जब्त स्मैक की कीमत लगभग 8 से 10 लाख रुपये आंकी जा रही है। तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक लग्जरी गाड़ी का सहारा लिया था, जिस पर “सीएस मधेपुरा” (CS Madhepura) का बोर्ड लगा हुआ था।
वाहन जांच के दौरान पकड़ी गई सफेद स्कॉर्पियो
सदर एसडीपीओ-1 (SDPO-1) अभिनव परासर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस पूरी कार्रवाई का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा नियमित वाहन जांच की जा रही थी, इसी दौरान एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो को रोका गया। गाड़ी की तलाशी लेने पर उसके अंदर से 800 ग्राम स्मैक बरामद हुई।
पुलिस ने मौके से ही दो ड्रग तस्करों को धर दबोचा, जिनकी पहचान इस प्रकार हुई है:
- दिलवर कुमार यादव (निवासी: सिंहेश्वर, मधेपुरा)
- रंजीत कुमार यादव (निवासी: घैलाढ़, मधेपुरा)
सिविल सर्जन (CS) मधेपुरा की गाड़ी और गुड्डू यादव का कनेक्शन
पुलिस की शुरुआती पूछताछ में गिरफ्तार तस्करों ने खुलासा किया है कि यह स्कॉर्पियो गाड़ी गुड्डू यादव नाम के व्यक्ति की है। वहीं, गाड़ी पर ‘सीएस मधेपुरा’ का बोर्ड लगे होने के मामले पर मधेपुरा के सिविल सर्जन (CS) विजय कुमार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने साफ कहा कि मार्च महीने के बाद से इस गाड़ी का आधिकारिक तौर पर कोई इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। तस्करों ने केवल जांच से बचने के लिए इस सरकारी बोर्ड का दुरुपयोग किया था।
मालदा-कालियाचक से मधेपुरा-सहरसा तक फैला है नेटवर्क
एसडीपीओ अभिनव परासर ने बताया कि नशीले पदार्थों की यह खेप पश्चिम बंगाल के मालदा-कालियाचक से बिहार लाई जा रही थी। चूंकि पूर्णिया जिला पश्चिम बंगाल की सीमा के काफी करीब है, इसलिए तस्कर इसे एक ‘सेफ पैसेज’ (सुरक्षित रास्ता) के रूप में इस्तेमाल करते हैं। यहाँ से स्मैक की सप्लाई मधेपुरा, सहरसा और सुपौल जैसे सीमावर्ती जिलों में की जानी थी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अब ड्रग सिंडिकेट पुलिस को चकमा देने के लिए लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर कर रहा है।
NDPS एक्ट के तहत होगी 20 साल तक की जेल
पुलिस ने बताया कि व्यावसायिक मात्रा (Commercial Quantity) में स्मैक बरामद होने के कारण आरोपियों पर एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की धारा 21सी के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस कानून के तहत दोषियों को 10 से लेकर 20 साल तक की कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।






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