पटना, बिहार: Bihar Education Department (बिहार शिक्षा विभाग) की ओर से अधिवेशन भवन में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला-सह-चिंतन शिविर का माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) जी ने विधिवत उद्घाटन किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने बिहार में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, गुणवत्तापूर्ण एवं छात्र-केंद्रित (Student-centric) बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णयों की घोषणा की है। सरकार का मुख्य लक्ष्य हर छात्र तक बेहतरीन शिक्षा पहुँचाना है।
अधिवेशन भवन में लिए गए 4 प्रमुख ऐतिहासिक फैसले
बिहार की शिक्षा व्यवस्था में क्रांति लाने के लिए सरकार ने निम्नलिखित कदम उठाने का निर्णय लिया है:
1. हर विद्यालय बनेगा उत्कृष्टता का केंद्र (Center of Excellence)
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को राज्य के हर स्कूल तक पहुँचाने और छात्रों के सीखने के स्तर (Learning Level) में निरंतर सुधार के लिए एक विशेष राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों से भी बेहतर बनाना है।
2. परीक्षा व्यवस्था में होगा व्यापक सुधार और AI का उपयोग
परीक्षाओं को सुचारु, पारदर्शी, निष्पक्ष एवं आधुनिक बनाने के लिए राज्य स्तरीय परीक्षा सुधार समिति का गठन किया गया है। यह समिति निम्नलिखित अहम सुझाव देगी:
- बोर्ड (Board Exams) और प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) में आधुनिक तकनीक का उपयोग।
- कक्षा-आधारित परीक्षाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग।
- छात्रों के ज्ञान, समझ एवं विश्लेषण क्षमता के बेहतर आकलन की व्यवस्था।
3. छात्रों से सीधे संवाद के लिए ‘सहयोग शिविर’
शिक्षा सुधार के लिए राज्य भर में विशेष ‘सहयोग शिविर’ आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों की खासियत यह होगी कि इसमें मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद एवं विधायक सीधे छात्रों से संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं व सुझावों को करीब से जानेंगे।
4. छात्र कल्याण निदेशालय का गठन
छात्रों के कल्याण से जुड़े कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए संबंधित विभागों में छात्र कल्याण निदेशालय (Directorate of Student Welfare) का गठन किया जाएगा।







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