मधेपुरा: महंगाई, बेरोजगारी और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरे किसान, मजदूर और नौजवान

By Gaurav Kabir

Published on: अभी-अभी

​मधेपुरा:पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की आसमान छूती कीमतों, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और सरकार की कथित जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सोमवार (25 मई) को मधेपुरा में किसानों, मजदूरों और नौजवानों का भारी हुजूम सड़क पर

मधेपुरा:पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की आसमान छूती कीमतों, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और सरकार की कथित जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सोमवार (25 मई) को मधेपुरा में किसानों, मजदूरों और नौजवानों का भारी हुजूम सड़क पर उतर आया। राज्यव्यापी आह्वान के तहत अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS), अखिल भारतीय युवा जनवादी संघ (AIYF) और भारतीय खेत मजदूर यूनियन (BKMU) के संयुक्त तत्वावधान में समाहरणालय रोड स्थित बीपी मंडल चौक पर विशाल विरोध प्रदर्शन किया गया।

​प्रदर्शनकारियों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, बीज अधिनियम, विद्युत अधिनियम 2025 और चारों लेबर कोड का कड़ा विरोध जताते हुए गरीबों के आशियाने पर हो रही बुलडोजर कार्रवाई पर भी गहरा रोष व्यक्त किया।

​इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किसान सभा के जिला सचिव मुकुंद प्रसाद यादव, खेत मजदूर यूनियन के जिला संयोजक अंबिका मंडल और नौजवान संघ के जिला संयोजक बूटीश स्वर्णकार ने संयुक्त रूप से किया। वहीं, कार्यक्रम की अध्यक्षता किसान सभा के जिलाध्यक्ष रमण कुमार ने की।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें:

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): C2 + 50% के फॉर्मूले पर एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए।
  • रोजगार एवं भत्ता: मनरेगा को पूरी तरह पुनर्बहाल किया जाए। बेरोजगार नौजवानों को रोजगार मिले या 10,000 रुपये मासिक बेरोजगारी भत्ता दिया जाए।
  • भूमिहीनों को अधिकार: सभी भूमिहीनों को वासगीत पर्चा निर्गत किया जाए।
  • कृषि एवं पेंशन: फसल बीमा योजना लागू हो। 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों और मजदूरों को 6000 रुपये मासिक पेंशन मिले और किसानों का कर्ज माफ हो।
  • मुआवजा एवं खरीद: हाल ही में बारिश और तूफान से हुई फसल क्षति का तुरंत मुआवजा मिले और मक्का की खरीद घोषित समर्थन मूल्य पर सुनिश्चित हो।

“कॉर्पोरेट नीतियों से तबाह हुआ देश”

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव प्रमोद प्रभाकर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमेरिकापरस्त कॉर्पोरेट नीतियों से देश तबाह हो चुका है और किसानी-रोजगार गहरे संकट में है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, बीज अधिनियम और विद्युत अधिनियम 2025 को उन्होंने देश की संप्रभुता के खिलाफ बताया।

​प्रमोद प्रभाकर ने अंतरराष्ट्रीय हालात पर भी चिंता जताई। उन्होंने इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को मानवता और विश्व शांति के खिलाफ बताते हुए इसमें भारत सरकार की भूमिका को अत्यंत आपत्तिजनक करार दिया। उन्होंने सख्त चेतावनी दी कि गरीबों और भूमिहीनों के आशियाने पर बुलडोजर कार्रवाई किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

“यह सरकार किसानों की नहीं, कंपनियों की है”

​भाकपा के जिला मंत्री विद्याधर मुखिया ने किसानों के कर्ज माफी और पेंशन की मांग पुरजोर तरीके से उठाई। वहीं, किसान नेता रमेश कुमार शर्मा, अनिल भारती और शैलेंद्र कुमार सुमन ने डबल इंजन सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “यह सरकार किसानों की नहीं, बल्कि कंपनियों की है। देश में कंपनी राज नहीं चलेगा और किसानों-मजदूरों पर हमले तुरंत बंद होने चाहिए।”

बड़ी संख्या में शामिल हुए लोग

इस विरोध प्रदर्शन में किसान, मजदूर और युवाओं की भारी भीड़ देखी गई। प्रमुख रूप से दिगंबर झा, जगत नारायण शर्मा, राजीव कुमार यादव, कुंदन यादव, दिलीप पटेल, अरुण कुमार तांती, छात्र नेता वसीमउद्दीन (नन्हें), शुभम स्टालिन बाबुल, मजदूर नेता उमाशंकर मुन्ना, अजीत शर्मा, मनोज राम सहित वैभव कुमार, सूरज कुमार, मोहम्मद इकबाल, सरस्वती कुमारी और अन्य कई गणमान्य लोगों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई।

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