मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज थाना क्षेत्र में पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां वार्ड संख्या 14 स्थित नहर पुल के पास खुलेआम लाखों रुपये की एक्सपायरी दवाएं (Expired Medicines) जला दी गईं। इतनी बड़ी मात्रा में मेडिकल कचरे को खुले में जलाए जाने से इलाके के लोग हैरान और परेशान हैं।
बताया जा रहा है कि ये दवाएं किसी स्थानीय दवा एजेंसी से संबंधित थीं। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग (Health Department) हरकत में आ गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
धुएं और बदबू से लोग हुए परेशान
दवाओं के जलने से उठे जहरीले धुएं और तेज बदबू के कारण आसपास के निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
- स्थानीय लोगों के अनुसार, इलाके में काफी देर तक धुआं छाया रहा।
- धुएं में केमिकल की गंध होने के कारण लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत महसूस हुई।
- ग्रामीणों ने चिंता जताते हुए कहा कि इस तरह खुले में दवाएं जलाना सीधे तौर पर लोगों की सेहत और पर्यावरण के लिए खतरनाक है।
बायो-मेडिकल वेस्ट नियमों की उड़ी धज्जियां
विदित हो कि मेडिकल कचरे और एक्सपायरी दवाओं के निपटान (Disposal) के लिए सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सख्त नियम बनाए हैं।
- बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियम (Bio-Medical Waste Management Rules) के तहत ऐसे कचरे को वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से नष्ट करना अनिवार्य होता है।
- इसके बावजूद, नियमों को ताक पर रखकर सरेआम दवाओं में आग लगा दी गई।
- ग्रामीणों ने इस मामले में प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों के बीच यह भी चर्चा का विषय है कि एक साथ इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं एक्सपायर कैसे हो गईं और इन्हें गुपचुप तरीके से खुले में क्यों जलाया गया।
जांच के बाद होगी सख्त कार्रवाई: डॉ. रूपेश कुमार
इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रूपेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि खुले में एक्सपायरी दवाएं जलाना पूरी तरह से नियम के विरुद्ध है।
“संबंधित दवा दुकानदार से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। मामले की गहन जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी।” – डॉ. रूपेश कुमार, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी







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