मधेपुरा (बिहार): जिले के बिहारीगंज प्रखण्ड में उच्च शिक्षा की बदहाल स्थिति को सुधारने और छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा के अवसर प्रदान करने के लिए एक आधुनिक सुविधाओं से लैस राजकीय डिग्री महाविद्यालय खोलने की मांग उठने लगी है। इस संदर्भ में बी०एन०एम०यू० (BNMU), मधेपुरा के पूर्व स्नातकोत्तर काउंसिल मेंबर सह-आंतरिक परिवाद समिति के सदस्य डॉ० बिट्टू कुमार ने बिहार के माननीय मुख्यमंत्री को एक मांग पत्र सौंपा है।
मुख्य बिंदु
- मुख्यालय से दूरी: बिहारीगंज से जिला मुख्यालय की दूरी 50-60 किलोमीटर है।
- आर्थिक तंगी बनी बाधा: क्षेत्र के लोगों का मुख्य पेशा कृषि और मजदूरी है, जिससे उच्च शिक्षा का खर्च उठाना मुश्किल है।
- राजनीतिक उपेक्षा: पिछले 25 वर्षों से एनडीए (NDA) को समर्थन देने के बावजूद क्षेत्र विकास से वंचित।
- मांग: इसी सत्र से बिहारीगंज में एक स्नातक स्तरीय राजकीय डिग्री कॉलेज की स्थापना हो।
दूरी और गरीबी के कारण उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे छात्र
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में डॉ० बिट्टू कुमार ने बताया कि बिहारीगंज प्रखण्ड का क्षेत्रफल 25 किलोमीटर में फैला हुआ है। यहाँ के अधिकतर लोग किसानी और मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते हैं। जिला मुख्यालय से 50 से 60 किलोमीटर की दूरी होने के कारण यहाँ के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए शहर जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आर्थिक तंगी और यातायात के अभाव में कई मेधावी और गरीब छात्र-छात्राएं उच्चतर शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
25 वर्षों के समर्थन के बावजूद विकास की अनदेखी
डॉ० कुमार ने पत्र के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर भी आकृष्ट किया है कि बिहारीगंज की जनता ने लगातार 25 वर्षों से एनडीए (NDA) गठबंधन को अपना बहुमूल्य वोट देकर जीत दिलाई है। लेकिन, जब क्षेत्र के विकास और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की बात आती है, तो बिहारीगंज को हमेशा नजरअंदाज किया जाता है।
इसी सत्र से कॉलेज शुरू करने का अनुरोध
मुख्यमंत्री के साथ-साथ माननीय उच्च शिक्षा मंत्री, उच्च शिक्षा निदेशक और मुख्य सचिव (बिहार सरकार) को भी इस पत्र की प्रतिलिपि भेजी गई है। डॉ० बिट्टू कुमार ने पुरजोर मांग की है कि छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य और अभिभावकों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए, सरकार इसी सत्र से बिहारीगंज में कम से कम एक स्नातक स्तरीय आधुनिक राजकीय महाविद्यालय की स्थापना करे। इससे ग्रामीण प्रतिभाओं को निखरने का मौका मिलेगा और अभिभावक कम खर्च में अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिला सकेंगे।







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