मधेपुरा। जिला समाहरणालय में मंगलवार को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत जिला स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिला पदाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में संपन्न हुई वर्ष 2026 की इस द्वितीय बैठक में पीड़ितों को न्याय और राहत पहुँचाने के लिए कई बड़े निर्णय लिए गए।
मुआवजा और रोजगार पर बड़ा फैसला
बैठक के दौरान जिले में लंबित मामलों की समीक्षा की गई और भारी संख्या में मुआवजे की राशि स्वीकृत की गई:
- प्राथमिकी स्तर पर: कुल 35 मामलों में 53 पीड़ितों/आश्रितों को मुआवजा देने की स्वीकृति मिली।
- आरोप पत्र (Charge Sheet) स्तर पर: 49 मामलों में 75 पीड़ितों/आश्रितों को सहायता राशि देने का निर्णय लिया गया।
- सरकारी नौकरी: सबसे महत्वपूर्ण निर्णय के तहत, हत्या के मामलों में अधिनियम की धारा 15 (1) (घ) के अंतर्गत 11 आश्रितों को परिचारी के पद पर सरकारी नौकरी प्रदान की गई है।
मैनुअल स्कैवेंजर पुनर्वास पर कड़ा निर्देश
इसी क्रम में मैनुअल स्कैवेंजर रोजगार निषेध एवं पुनर्वास अधिनियम 2013 की भी समीक्षा की गई। जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जिले में यदि हाथ से मैला ढोने (Manual Scavenging) से संबंधित कोई भी मामला संज्ञान में आता है, तो संबंधित अधिकारियों को उस पर तत्काल और त्वरित कार्रवाई करनी होगी।
बैठक में उपस्थित मुख्य पदाधिकारी
इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया:
- उप विकास आयुक्त (DDC) एवं जिला कल्याण पदाधिकारी।
- सिविल सर्जन और पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय)।
- विशेष लोक अभियोजक।
- माननीय सांसद (मधेपुरा एवं सुपौल) के प्रतिनिधि।
- माननीय विधायक (आलमनगर एवं सिंहेश्वर) के प्रतिनिधि।
- मंडल रेल प्रबंधक (समस्तीपुर) के प्रतिनिधि एवं नगर परिषद के सिटी मैनेजर।






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